
अयोध्या
दिल्ली में हुए ब्लास्ट पर ओजस्वी फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं जगद्गुरु परमहंस आचार्य के उत्तराधिकारी राजर्षि महंत एकनाथ महाराज ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बस्ती मे एक कार्यक्रम मे पहुँचे एक नाथ महाराज ने कहा की उन्होंने इस घटना को कड़ी निंदा के साथ जोड़ते हुए कहा कि देश आज “विषम और विचलित करने वाली परिस्थितियों” से गुजर रहा है।
महंत एकनाथ ने कहा कि एक ओर देश में हिंदू राष्ट्र की मांग को लेकर सनातन एकता यात्रा निकाली जा रही है और नारे दिए जा रहे हैं—“जाति-पात की करो विदाई, हिंदू-हिंदू भाई-भाई”—लेकिन दूसरी ओर संविधान की सीमाओं से बाहर जाकर ऐसे कार्य हो रहे हैं, जो भारत की एकता को मजबूत करने के बजाय कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या इन यात्राओं से वास्तव में हिंदुओं को उनका अधिकार मिलेगा या यह सिर्फ एक भावनात्मक लहर बनाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश है? महंत महाराज ने कहा—
“जाति रहेगी या नहीं, यह मुद्दा नहीं। असली समस्या है जाति का अहंकार, जो आज हर धर्म, हर समुदाय और हर मनुष्य में कूट-कूटकर भरा है।”
बाबा बागेश्वर की यात्राओं पर सीधी टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि यह हिंदू राष्ट्र एकता यात्रा नहीं, बल्कि “लोकप्रियता और फॉलोअर बढ़ाने की यात्रा” अधिक प्रतीत होती है।
उन्होंने कहा कि उनके हिसाब से भारत 1947 में ही हिंदू राष्ट्र बन चुका था, लेकिन वर्षों की राजनीति, संविधान में छेड़छाड़ और ‘सेक्युलर’ शब्द ने इसे विवादित बना दिया।
एकनाथ महाराज ने आरोप लगाया—
“कांग्रेस ने 70 साल में संविधान के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की। ‘सेक्युलर’ शब्द इसी का परिणाम है और यही कारण है कि भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने में बाधाएँ खड़ी हो रही हैं।”
देश की दिशा को लेकर उन्होंने बड़ी चिंता जताई।
“जहाँ भारत को महान बनाने का संकल्प लिया गया था, वहीं आज भारत महाभारत की ओर बढ़ता दिख रहा है। हमें संघर्ष नहीं, समरसता वाला भारत महान चाहिए।”
महंत एकनाथ ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि भारत वास्तुस्थिति में हिंदू राष्ट्र है, चाहे इसे लिखित रूप में घोषित न किया गया हो।उन्होंने कहा—
“जब मूल संविधान लागू होगा, सेक्युलर शब्द हट जाएगा और उसी दिन भारत स्वतः हिंदू राष्ट्र बन जाएगा। तब किसी ड्रामे की जरूरत नहीं पड़ेगी।”
अंत में उन्होंने देश में धार्मिक ध्रुवीकरण की बजाय मानव यात्रा निकालने की अपील की, जो लोगों में मानवता, दया, एकता और करुणा का भाव जगाए।हम वसुधैव कुटुंबकम के मानने वाले लोग हैं। राजनीतिज्ञ हमें जाति-पात में बांट रहे हैं, जबकि देश संविधान से चलता है, किसी धर्म से नहीं।” महंत महाराज ने कहा कि जब मूल संविधान लागू होगा, तब भारत न सिर्फ हिंदू राष्ट्र की अवधारणा को सिद्ध करेगा, बल्कि दुनिया को मानवता और एकता का संदेश देने वाला शक्तिशाली राष्ट्र बनेगा।