खजनी नवंबर श्रीमद् भागवत महापुराण के सप्तम दिवस में महारास की कथा की चर्चा हुई भगवान श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ जो लीला की श्री कृष्णा बिंब है गोपिया प्रतिबिंब है यह आत्मा और परमात्मा के लीला है जीव और शिव की लीला है भक्त भगवान के लीला है महारास की लीला अद्भुत आनंद को देती हैं जीवन में भगवान कृष्ण के भक्ति प्रदान कराती है गोपी उद्धव संवाद के माध्यम से प्रेम और ज्ञान की चर्चा हुई ज्ञानी जी ब्रह्म को नीचे निराकार रूप में वर्णन करते हैं प्रेमी उसे भगवान को साकार करके दिखाता है प्रेम मार्ग से भगवान जल्दी रिझ जाते 
हैं श्री कृष्ण की प्रेम की दीक्षा ब्रज की गोपियों से प्राप्त होती है ब्रज की गोपियों ने भगवान से सहज प्रेम किया बड़े-बड़े महात्मा जो गोपी बनाकर के आए भगवान श्री कृष्ण की महारास की लीला में सन्निधि प्राप्त करके अपने जीवन को धन्य कीये रुक्मणी कृष्ण विवाह की अद्भुत चर्चा हुई रुक्मणी ने भगवान श्री कृष्ण से सहज प्रेम किया और उन्होंने अपने गुरु को पत्र लिखकर के दिया गुरु ने पत्र ले जाकर भगवान श्री कृष्ण को दिया भगवान श्री कृष्ण ने रुक्मणी के प्रेम पत्र को पढ़कर के रुक्मणी को प्रभु ने स्वीकार किया जिस तरह गुरु कृपा से रुक्मणी को प्रभु ने स्वीकार किया ऐसे जब हमारे ऊपर भी गुरु कृपा होते हैं तो हमें गोविंद मिल जाते हैं गोविंदा की कृपा हो जाती है भगवान कृष्ण की अनुभूति हो जाती है। श्रीकृष्ण रुक्मिणी जी की अद्भुत झाँकी प्रस्तुत की गयी,यजमान के परिवार एवं बंधु बांधव ने श्रीकृष्ण रुक्मिणी जी का पैर प्रच्छालन कर विधि विधान से पूजन अर्चन किया इस अवसर पर धराधाम प्रवर्तक सौहार्द शिरोमणि डा. सौरभ पाण्डेय, अंतरराष्ट्रीय बालव्यास श्वेतिमा माधव प्रिया, भारत समाचार के पत्रकार कृपाशंकर राय, डा.राम सिंह मौर्या, गोपाल गुप्ता, सरवन वर्मा, श्री कृष्णा गुप्ता, गोविंद गुप्ता, पद्मिनी शर्मा जी की विशेष उपस्थिति रही।