लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के सुचारू और व्यवस्थित संचालन के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शासनादेश के अनुसार, जिन विद्यालयों की प्रबन्ध समिति, साधारण सभा या ट्रस्ट का कोई सदस्य जीवित नहीं है या जो विगत पाँच वर्षों से अधिक समय से कालातीत हैं तथा जहाँ शिक्षक-कर्मचारियों के वेतन भुगतान हेतु एकल संचालन की व्यवस्था प्रभावी है, उनके संचालन की जिम्मेदारी अब एक नई व्यवस्थागत ढांचे के तहत होगी।माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव ने बताया कि 27 अगस्त, 2025 के शासनादेश के तहत ऐसे विद्यालयों का संचालन अब संबंधित जनपद के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति द्वारा किया जाएगा। यह समिति किसी विभागीय अधिकारी (श्रेणी-2 स्तर से अन्यून) को प्रबन्धक के रूप में नामित करेगी, जो सीधे समिति के प्रति उत्तरदायी होगा। प्रबन्धक का कार्यकाल अधिकतम पाँच वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है।वर्तमान में प्रदेश के 228 अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में प्रबन्ध समिति कालातीत होने के कारण एकल संचालन की व्यवस्था लागू है। इनमें से 124 विद्यालयों में यह व्यवस्था पाँच वर्षों से अधिक समय से चल रही है।नवीन शासनादेश के बाद इन विद्यालयों में प्रबन्धकीय कार्यों के साथ-साथ परिसम्पत्तियों की देखरेख, शिक्षकों-कर्मचारियों के सेवा संबंधी समस्त प्रकरण जैसे अवकाश, जी0पी0एफ0, पेंशन, चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति, अधियाचन, पदोन्नति, चयन/प्रोन्नत वेतनमान, वरिष्ठता सूची निर्धारण, महिला कर्मचारियों के विशेष अवकाश और अनुशासनिक कार्यवाही आदि अब जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा नामित प्रबन्धक के माध्यम से क्रियान्वित किए जाएंगे।इस कदम से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का संचालन पारदर्शी, उत्तरदायी और नियमित होगा, जिससे शिक्षक-कर्मचारी और छात्र दोनों के हित सुनिश्चित होंगे।