उन्मुक्त उड़ान साहित्यिक मंच द्वारा इस सप्ताह के समसामयिक विषय “बदलते पर्यावरण के कारक एवं पर्यावरण के प्रति मानव के कर्तव्य” पर सारगर्भित लेखों एवं रचनाओं की प्रस्तुतियों के माध्यम से पर्यावरण चेतना को जागृत किया गया।
इस क्रम में अनु तोमर ‘अग्रजा’ ने अपने साप्ताहिक आलेख के माध्यम से पर्यावरण को हानि पहुँचाने वाले प्रमुख कारकों जैसे– अव्यवस्थित नगरीकरण, वनों की अंधाधुंध कटाई, प्रदूषण के विविध रूप तथा जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का विश्लेषण करते हुए उनके समाधान के लिए जन-जागरूकता और सामूहिक सहभागिता पर विशेष बल दिया।
विचार-श्रृंखला में सुरेन्द्र कुमार बिंदल, अरुण सक्सेना, संजीव कुमार भटनागर ‘सजग’, दिव्या भट्ट ‘स्वयं’, विनीता नरूला ‘प्रसन्ना’, अनु तोमर ‘अग्रजा’, सुरेश सरदाना, अशोक दोशी ‘दिवाकर’, परमा दत्त झा, अरुण ठाकर, माधुरी शुक्ला, अनीता राजपाल ‘अनु वसुंधरा’, वीना टण्डन ‘पुष्करा’, सुरेश चंद्र जोशी ‘सहयोगी’, स्वर्णलता सोन ‘कोकिला’, प्रजापति श्योनाथ सिंह ‘शिव’ एवं राज कुमार ‘मानव’ जैसे रचनाकारों ने अपने प्रखर एवं सकारात्मक विचारों से न केवल पर्यावरणीय संकटों की ओर ध्यान दिलाया, अपितु उनके निराकरण में प्रत्येक मानव की भूमिका का संवेदनशील विश्लेषण किया।
विशेष रूप से, डॉ. दवीना अमर ठकराल ‘देविका’ ने अपने विशिष्ट शैली में समवेत स्वर में यह प्रेरणादायक संदेश दिया—
“आइए मिलकर लेते हैं एक संकल्प
धरती करे पुकार, मिलकर रखें इसकी लाज,
सुनो धरा की वेदना, पर्यावरण धरती का ताज।
सिसक रही आतुर धरा, आहत निज संतान,
लगाओ पेड़, बचाओ नदियाँ, प्रकृति का रखो मान।”
सप्ताह के अन्य कार्यक्रमों में “मेरी साइकिल” शीर्षक पर रचित बालगीतों की बाल्य स्मृतियों से सराबोर प्रस्तुति रही, जिसमें सभी रचनाकारों ने बचपन की मधुर झलकियों को गीतों के माध्यम से जीवंत किया। साथ ही मंच की विशेषता रही 40 रचनाकारों द्वारा पर्यावरण विषयक चार पंक्तियों के संदेश, जिनमें उन्होंने समाज, राष्ट्र और पृथ्वी के प्रति अपनाई जाने वाली जिम्मेदारियों को सरल भाषा में जनमानस तक पहुँचाया।
कार्यक्रम के अंत में सभी चयनित और सम्मानित रचनाकारों को अनुपम सम्मान पत्र प्रदान किए गए, जिनकी कल्पना और रचनात्मकता नीरजा शर्मा ‘अवनि’ और नीतू रवि गर्ग ‘कमलिनी’ द्वारा की गयी|
उन्मुक्त उड़ान मंच का यह साप्ताहिक आयोजन न केवल साहित्यिक सहभागिता का परिचायक रहा, अपितु पर्यावरण के प्रति जन-जागरूकता और जिम्मेदारी का सशक्त आह्वान भी बना।
– उन्मुक्त उड़ान मंच