,,,,,,अफसोस सद अफसोस,,,,
फ़िराक़ गोरखपुरी की धरती का एक ऐसा सच्चा कलमकार हमने खो दिया, जिसे आने वाली साहित्यिक और अदबी पीढ़ियाँ बरसों याद रखेंगी,,,,,,

अनुराग लक्ष्य, 26 मई
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
लिखते हुए क़लम थरथरा भी रही है, और दर्द में डूबी भी हुई है, लेकिन जो सच है उसे तो लिखना ही पड़ेगा। और सच यह है कि,
,,, इश्क़ वफा और प्यार मुहब्बत सब कुछ,सुरेन्द्र, तुम्हारे नाम,
सुबहा की लाली शाम की रंगत सब कुछ ,सुरेन्द्र, तुम्हारे नाम ,
ज़िंदगी रहेगा नाम तुम्हारा जब तक चाँद सितारे है,
इल्म ओ अदब की इक इक दौलत सब कुछ , सुरेन्द्र, तुम्हारे नाम,,,,
मैं सलीम बस्तवी अज़ीज़ी आपको यह बताते हुए बहुत रंजूर हूँ कि फिराक गोरखपुरी की धरती का अज़ीम शायर सुरेन्द्र शास्त्री अब इस दुनिया में नहीं रहे। आज गोरखपुर के राप्ती नदी पर उनको मुखाग्नि दी जाएगी।
गोरखपुर के कवि सम्मेलनों और मुशायरों में अक्सर मेरी मुलाकात उनसे हो जाया करती थी। जिनके मनमोहक व्यक्तित्व से हर कोई प्रभावित हो जाता था। मैं भी उन्हीं में से एक था। इधर लंबे समय से वह अस्वस्थ चल रहे थे। अंततः ज़िंदगी ने उनसे अपना नाता तोड़ लिया और हम सबने अपने चहीते शायर सुरेन्द्र शास्त्री को खो दिया।
आज वह भले हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनकी रचनाएँ हमेशा हमारे दिलों में ज़िंदा रहेंगी।
1/क्या दफ़्न है आवाज़ भी इंसान की तरह |
सारा शहर खामोश है शमशान की तरह ||
2/हर हाल में मारा गया है आम आदमी |
वो राम की तरह हो या रहमान की तरह ||
3/बाज़ार से इंसान की हस्ती ख़रीद कर |
गिन गिन के रख रहा है वो सामान की तरह ||
4/बैठा वो जो जाल प दाने बिखेर कर |
बाँटेगा मौत लोगों में अनुदान की तरह ||
5/सब कुछ तो भीड़ में है मगर आँख नहीं है |
टकरा रहे हैं खुद से हम चट्टान की तरह ||