– गायघाट नगर पंचायत में झारखंडेश्वर नाथ धाम मे चल रहा श्रीराम महायज्ञ
कुदरहा, बस्ती: नारायण प्रतिक्षा व प्रेम के भाव से मिलते है।जिनके अंदर सेवा भाव भक्ति रहती है। तो भगवान भक्त से समय -समय मिलते है। राजा दशरथ और माता कौशिल्या को नारायण के जन्म के लिए प्रार्थना यज्ञ और प्रतिक्षा करनी पड़ी। मानव को अपने जीवन मे प्रेम भाव बढ़ाने की जरूरत है।
उक्त सद्वविचार झारखंडेश्वर नाथ धाम गायघाट मे श्रीराम महायज्ञ के दौरान चल रही ग्यारह दिवसीय संंगीतमयी राम कथा तीसरे दिन मानस मर्ममज्ञ बाल भरत जी महाराज ने रामकथा की अमृत बर्षा की। कथा को विस्तार देते हुए उन्होने कहा कि राम कथा के श्रवण से स्वाभाव सरल और जीवन शुद्ध हो जाता है। भगवान के जन्म के पांच कारण मानस के अनुसार थे। भवान ने राक्षसों के संहार हेतु नही अपितु संतों के कल्याण हेतु अवतार लिया था। राजा दशरथ ने पुत्र की प्राप्ति का यत्न कर भगवान को बालरुप मे पाया था। पजिस खुशी अयोध्या खुशियो से झूम उठती है। यहां तक देवी देवता पुष्प की बर्षा कर भगवान के बाल रुप का दर्शन करते है ।
कथा में मुख्य रुप से स्कंद पाल, राजेन्द्र प्रसाद उर्फ लाला, हरिहर प्रसाद शुक्ला, सूर्य नारायण मिश्रा,पं आनंद मिश्रा, राम सुरेश सोनकर, कन्हैया लाल गुप्ता, प्रेमनारायण आजाद, मनीष तिवारी, दुर्गेश अग्रहरि, पुरुषोत्तम मिश्रा, नागेन्द्र द्विवेदी, विष्णु दत्त शुक्ला,राम मनोहर गौड़, कृष्ण नारायण द्विवेदी, विजय कुमार द्विवेदी, मनीष त्रिपाठी सहित तमाम श्रद्धालु उपस्थित रहे।