शीर्षक : राधा कृष्ण
बरसाने की गलियों में, बंसी की धुन छाई,
श्याम नाम की मीठी लहर, हर दिल को बहलाए।
राधा की पायल बोले, प्रेम की भाषा प्यारी,
कान्हा की मुस्कान में, छुपी है दुनिया सारी।
चाँद भी शर्मा जाए, ऐसी उनकी जोड़ी,
राधा संग कृष्ण लगे, जैसे सागर में लहरी।
यमुना के तट पे बैठ, रास रचाते हैं,
प्रेम के रंगों से, जग को सजाते हैं।
राधा है श्रद्धा जैसी, कृष्ण हैं विश्वास,
दोनों मिलकर बनते हैं, प्रेम का इतिहास।
मुरली की तान सुन, हर मन झूम जाए,
राधा नाम के बिना, कान्हा अधूरे कहलाए।
फूलों सी महके उनकी, प्यारी सी कहानी,
राधा के संग ही पूरी, कृष्ण की हर निशानी।
नैनों में बसे हैं, एक-दूजे के सपने,
राधा-कृष्ण का प्रेम, जग में सबसे अपने।
जो भी सच्चे मन से, इनका नाम पुकारे,
जीवन के हर दुख से, वो पार उतर जाए।
भक्ति में जो डूबे, पाता सच्चा प्यार,
राधा-कृष्ण का प्रेम है, सबसे बड़ा उपहार।
स्वराजित /मौलिक
राजलक्ष्मी श्रीवास्तव
जगदलपुर राजिम
छत्तीसगढ़