भारतीय ज्ञान परम्परा के माध्यम से हम विश्व गुरु बन सकते है – प्रो. विकास शर्मा
बस्ती – महिला महाविद्यालय, बस्ती में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुदानित कल्चरल क्लब ‘स्पृहा’; यू.जी.सी. एम.एम.टी.डी.सी. एच.आर.डी.सी. जोधपुर, राजस्थान तथा प्राचीन इतिहास, पुरातत्व एवं संस्कृति विभाग, महिला महाविद्यालय के संयुक्त तत्त्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “भारतीय ज्ञान परंपरा: रामायण और रामचरितमानस के विशेष संदर्भ में”दिनांक 08 मई 2025 को संगोष्ठी का समापन किया गया।
संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य अतिथि श्री श्रीप्रकाश पाण्डेय, समाज कल्याण अधिकारी बस्ती, मुख्य वक्ता प्रख्यात उपन्यासकार और कवि प्रो विकास शर्मा ,विभागाध्यक्ष, अंग्रेजी विभाग, चौधरी चरण सिंह, मेरठ), वक्ता डॉ. ज्योति शुक्ला (सहायक सम्पादक, भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली) एवं महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुनीता तिवारी ने मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पण एवं दीप प्रज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुनीता तिवारी ने मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, प्रतिष्ठित वक्ता एवं विशिष्ट अतिथियों का स्वागत सम्मान स्मृति चिह्न प्रदान करते हुए किया। महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. सुनीता तिवारी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि वर्तमान परिदृश्य में भारतीय ज्ञान परम्परा के अंतर्गत रामायण और राम चरित मानस का अध्ययन आवश्यक है । संगोष्ठी के समापन सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. विकास शर्मा ने भारतीय ज्ञान परम्परा को ज्ञान का समुद्र बताते हुए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत ज्ञान के संतुलन (पुरातन विज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान) की बात कही। आपने बताया कि भारतीय ज्ञान परम्परा, पुरातन जीवन शैली का प्रतिबिंब है। भारतीय संस्कृति और ज्ञान परंपरा का वैश्विक महत्व अतीत काल से लेकर वर्तमान काल तक है। मुख्य अतिथि श्री श्रीप्रकाश पाण्डेय ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में रामायण और रामचरितमानस को भारत की आत्मा बताया। साथ ही बताया कि रामचरितमानस हमारे आत्मसात हेतु सुगम है क्योंकि रामचरितमानस हमारी सामाजिक व्यवस्था में समाधान के सुझाव प्रस्तुत करता है।समापन सत्र के अंत में आभार डॉ. रघुवर पाण्डेय ने दिया। मंच का संचालन डॉ. सुधा त्रिपाठी ने किया। कार्यक्रम की संयोजक डॉ रुचि श्रीवास्तव, डॉ नूतन यादव और डॉ सुधा त्रिपाठी रही।
कार्यक्रम के प्रथम चरण में तृतीय तकनीकी सत्र में कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती सरिता कुमारी (सहायक आचार्य, अंग्रेजी विभाग, ए.पी.एन. पी.जी. कालेज, बस्ती) ने किया,अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में भारतीय ज्ञान परम्परा में रामायण और रामचरितमानस के महत्व को इंगित किया,साथ ही तृतीय तकनीकी सत्र की मुख्य वक्ता डॉ. रतना सिंह (सहायक आचार्य, एम.एस.डी.एस. यूनिवर्सिटी, फर्रुखाबाद, उ.प्र.) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के संदर्भ में भारतीय ज्ञान परम्परा की प्रासंगिकता को प्रस्तुत किया,
राष्ट्रीय संगोष्ठी के द्वितीय दिवस के एक तकनीकी सत्र में ऑनलाइन और ऑफलाइन कुल 30 शोध पत्र पढ़े गए।
इस अवसर पर प्रमुख रूप से डॉ. सीमा सिंह, डॉ. रघुनाथ चौधरी, डॉ. बृजेश दूबे, डॉ. कंचन त्रिपाठी, डॉ. सौम्या पाल, डॉ. उपेन्द्र शुक्ला, डॉ. वीना सिंह, डॉ. स्मिता सिंह, डॉ. रोहित सिंह, डॉ. सुहासिनी सिंह, श्रीमती नेहा परवीन, डॉ. प्रियंका पांडेय, डॉ. कमलेश पांडेय, डॉ दिलीप त्रिपाठी, डॉ पूजा गुप्ता,नेहा श्रीवास्तव,मोनी पांडेय, गिरिजा नंद राव, सूर्या उपाध्याय, पूनम यादव, अनुराग शुक्ला सहित विभिन्न महाविद्यालयों के शिक्षक, शोध छात्र एवं महाविद्यालय की छात्राएं उपस्थित रही।