🔥🔥 ओ३म् 🔥🔥
*ज्ञानकुंभ स्नान कक्षा-१४*
🌸 ब्रह्माण्ड का पंचम तत्व ईश्वर!🌸
अभी तक हमने ज्ञानकुंभ में स्नान करके ब्रह्मांड के चार तत्व *शरीर,मन,बुद्धि व आत्मा* के बारे में संक्षिप्त में अनिवार्य जानकारी को प्राप्त किया है।आज पंचम तत्व ईश्वर के विषय में जानेंगे।गतांक से आगे ………………….
ईश्वर के विषय में ६ [ छ: प्रकार ] की विचारधारा है।
*(१)* कुछ लोग ईश्वर को मानते हैं मगर जानते नहीं।
*(२)* कुछ लोग ईश्वर को जानते तो हैं मगर मानते नहीं।
*(३)* कुछ लोग हैं जो कहते हैं कि ईश्वर है ही नहीं।केवल कल्पना है।
*(४)* कुछ लोग ईश्वर के बारे में उल्टी जानकारी रखते हैं और उसी को सत्य मानते हैं जैंसे ईश्वर को साकार मानकर उसकी मूर्ति पूजा करना।
*(५)* कुछ लोग संशयात्मा भी हैं कि पता नहीं ईश्वर है भी या नहीं।
*(६)* बहुत कम लोग हैं धरती पर जो ईश्वर को जानते भी हैं।मानते भी हैं।उस पर आचरण भी करते हैं।
🏵️सामान्य-प्रश्न? 🏵️
*जो लोग ईश्वर को नहीं मानते हैं उनकी दलील होती है कि अगर ईश्वर है तो दिखाई क्यों नहीं देता ?*
🌹 सम्यक् समाधान🌹
बहुत सटीक सा लगने वाला यह प्रश्न वास्तव में खुद पर ही प्रश्न खड़ा करता है। क्योंकि ये कोई जरुरी नहीं कि जो चीज *दिखाई नहीं देती वो होती ही नहीं*।संसार में ईश्वर को छोड़ दीजिए और भी बहुत वस्तुएं हैं जो नहीं दिखाई देती मगर वो होती हैं और हम उन्हें स्वीकार भी करते हैं।
*आओ इसका पता लगायें?*
अब हम आपको एक लंबी लिस्ट देते हैं उन पदार्थों की जिन्हें हम आंखों से नहीं देखते हैं फिर भी उन्हें मानते हैं।जरा ध्यान से पढ़ना।
*[१]* दूध में *घी* होता है मगर आंखों से दिखाई नहीं देता।फिर भी सब मान लेते हैं।
*[२]* पुष्पों में,इत्र में,कपूर में,कस्तूरी में *सुगंध* होती है मगर दिखाई नहीं देती।
*[३]* मल-मूत्र में,गंदी नालियों में,कचरे में *दुर्गंध* होती है मगर दिखाई नहीं देती।
*[४]* जल,बर्फ,चंद्रमा,आईस्क्रीम,शीत ऋतु में *शीतलता* होती है मगर दिखाई नहीं देती।
*[५]* अग्नि,सूर्य,ग्रीष्म ऋतु में *गर्मी* होती है मगर दिखाई नहीं देती।
*[६]* हमारे चारों ओर *वायु* है ।हम उसे लेते भी हैं छोड़ते भी हैं मगर दिखाई नहीं देती।
*[७]* तिल,सरसों,सोयाबीन,मूंगफली में *तेल* है मगर दिखाई नहीं देता।
*[८]* एक नन्हें से *बीज* में अंकुर,तना,शाखा,पत्ते,फूल,फल,विशाल वट वृक्ष छुपा है मगर दिखाई नहीं देता।
*[९]* सबके *अंत:करण* में हर्ष,प्रेम,करुणा,शोक,मोह,क्रोध के विकार हैं मगर दिखाई नहीं देते।
*[१०]* शरीर के अंदर *आत्मा व परमात्मा* दोनों हैं मगर दिखाई नहीं देते।
*महान आश्चर्य!!!!!*
शरीर के अंदर हम न दिखने वाले *आत्मा* को तो मान लेते हैं कि आत्मा है मगर *परमात्मा* को मानने के लिए तैयार नहीं हैं।
🌺 *सोचो!सोचो!!सोचो!!!*🌺
क्या कारण है कि हमने न दिखाई देने वाले *उपरोक्त १०चीजो* को मान लिया है और *ईश्वर* को नहीं मानते? कहते हैं कि *ईश्वर है तो दिखाओ?* कहते हैं।इस विषय पर परिचर्चा कल करते हैं क्रमश: ………………
आचार्य सुरेश जोशी
*वाटसप गुरुकुल महाविद्यालय* आर्यावर्त्त साधना सदन दशहरा बाग उत्तर-प्रदेश!