अनुराग लक्ष्य, 28 जनवरी
बस्ती संवाददाता ।
गणतंत्र दिवस के शुभ अवसर पर प्रेस क्लब के सभागार में बस्ती के साहित्य प्रेमियों द्वारा आयोजित कवि सम्मेलन और मुशायरा एक यादगार मुशायरे और कवि सम्मेलन में तब्दील हो गया। जिसकी श्रोताओं ने बेहद सराहा।
कवि सम्मेलन और मुशायरे की अध्यक्षता शहर के मशहूर ओ मारूफ एडवोकेट श्याम प्रकाश शर्मा ने की, वहीं बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे महेश श्रीवास्तव अधिशाषी अधिकारी ई ओ डुमरियागंज।
कार्यक्रम का सफल संचालन प्रेस क्लब के अध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय ने की।
कवि सम्मेलन और मुशायरा दीपक प्रेमी, शाद अहमद शाद, अनबार हुसैन पारसा, अफ़ज़ल हुसैन अफ़ज़ल, नेहा मिश्रा, डॉ अंजना कुमार के खूबसूरत गीतों और ग़ज़लों के साथ हुआ, जिसे सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए।
इसी क्रम मे मुख्य अतिथि महेश श्रीवास्तव की ग़ज़लों ने ख़ूब वाह वाही लूटी, इस कलाम के साथ,
,,,,, आए जहां ऋषि मुनि पुण्य कमाने,
हम आए हैं आज महा कुंभ नहाने ।
इसी तरह शायर अजीत श्रीवास्तव राज ने भी अपने बेहतरीन और मेयारी कलाम से श्रोताओं की खूब प्रशंसा बटोरी अपने इस कलाम के साथ,
,,, सबसे सब कुछ छिपाया जा रहा है,
झूठ को अब सच बताया जा रहा है,
किस्सा गठजोड़ का है ऐसा यहां,
जो न खाया था वोह खाया जा रहा है,,,
इसी तरह शायर अजय कुमार अश्क ने भी अपनी देश प्रेम परक रचनाओं से श्रोताओं को सराबोर कर दिया।
इसी तरह संचालन कर रहे प्रेस क्लब के अध्यक्ष विनोद कुमार उपाध्याय ने अपनी ग़ज़ल से खूब तालियां बटोरीं इस शेर के साथ,
,,,, कर कर के याद कितने ही आंचल भिगोए थे,
जाने वो बात क्या थी जो कि जी भर के रोए थे,,,,
इसी तरह कवित्री अर्चना श्रीवास्तव ने भी अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं के दिलों में उतर गईं, अपनी इन पंक्तियों के साथ,,,
,,, मेरी ग़ज़लें मेरी पहचान होंगी,
मुहब्बत का यहाँ उन्वान होंगी,
यक़ीं मानो मेरी बातों का अर्चना,
जो टूटे दिल हैं उनकी जान होंगी,,,
मुंबई से आए शायर एवं गीतकार सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने अपने खूबसूरत कलाम से सभी के दिलों में उतर गए इस कलाम के साथ, कि,
,,,, पिता की एक आज्ञा पर सहर्ष वनवास को जाना,
सहर्ष वनवास को जाना और लंका भी फतह करना,
तो ऐसे राम को शत शत यहाँ प्रडाम है मेरा,
अगर सच में तुम्हारे दिल में बस्ती है अयोध्या तो,
बसालो राम को दिल में यही पैग़ाम है मेरा,,,,
और, अंत में प्रसिद्धि कवि डॉ राम कृष्ण लाल जगमग की रचनाओं को भी श्रोताओं ने बेहद सराहा उनकी इन पंक्तियों के साथ,
,,,अपने और पराए का कुछ ज्ञान नहीं था,
सच कहता हूँ यह रिश्ता आसान नहीं था,
एक झलक में तुम्हें देवता माना मैने,
तुम पत्थर निकलोगे यह अनुमान नहीं था,,,
देर शाम तक चले इस कवि सम्मेलन और मुशायरे में राजेंद्र उपाध्याय, राकेश तिवारी, राजेश पांडे, आदित्य राज सहित तमाम श्रोताओं और सहयोगियों की भूमिका सराहनीय रही।