*वाटसप गुरुकुल कक्षा-४*आचार्य सुरेश जोशी

🪷🪷 ओ३म् 🪷🪷
*वाटसप गुरुकुल कक्षा-४*
पिछली कक्षाओं में हमने जाना कि शरीर जड़ प्रकृति से परमात्मा ने जीवात्मा के लिए एक साधन बनाया है जिसमें बैठकर जीवात्मा उत्तम व निष्काम कर्म द्वारा मुक्ति को प्राप्त कर सके। शरीर कर्म स्वयं नहीं करता अपितु जीवात्मा इससे कर्म कराता है। *जैंसे मोटर साईकिल स्वयं नहीं चलती ड्राईवर ही उसे चलाता है। अब ड्राईवर की मर्जी मोटर साईकिल लेकर मूवी देखने सिनेमा हाल जाये या सत्संग भवन* ।उसी प्रकार आत्मा रुपी ड्राईवर की इच्छा है कि शरीर को संगम के पानी में ले जाकर डुबकी लगाये या शरीर से किसी वेदज्ञ विद्वान के चरणों में बैठकर सत्संग कर अपनी आत्मा को ज्ञानकुंभ में स्नान कराये। *शरीर परतंत्र है ,असहाय है,जड़ है जबकि आत्मा चेतन है।स्वतंत्र है*। गतांक से आगे……..……..
🦚 *दूसरा पदार्थ मन*🦚
शरीर के बाद ब्रह्माण्ड का दूसरा पदार्थ है मन।मन भी जड़ पदार्थ है।मन को भी भगवान प्रकृति से ही बनाते हैं।* *अहंकार से भगवान ने जो १६ पदार्थ बनाये उनमें से १६ वां पदार्थ मन है। शरीर स्थूल पदार्थ है जबकि मन थोड़ा सूक्ष्म है मगर है जड़ पदार्थ*।बनाता है इसे भगवान है मगर प्रयोग जीवात्मा करता है।जैंसे कार बनती है फैक्ट्री मे मगर चलाता कोई ओर है। जीवात्मा मन बना नहीं सकता इसलिए भगवान दयालु बनकर जीवात्मा को बनाकर देता है।
मन से जीवात्मा अच्छे या बुरे संकल्प करता है अपने संग्रहीत संस्कारों से।
🔥 *धर्म जिज्ञासा*🔥
जब मन जड़ पदार्थ है तो फिर यह ऐंसा क्यों कहता है कि* *मेरा मन आज घूमने,नाचने,गाने का हो रहा है?* आज मेरा मूड ठीक नहीं है?
🌹 *सम्यक् समाधान*🌹
अविद्या व अज्ञान व जन्म-जन्मांतरों के अविद्याजनित संस्कारों से ऐसा कहता है।इसे आप एक उदाहरण से समझें आपके समझ में आ जायेगा!
*एक आदमी स्कूटी से सड़क पर जा रहा था अचानक दुर्घटना हुई और स्कूटी एक गढ्ढे में गिर ग ई।अब आप बुद्धि पूर्वक उत्तर दीजिए क्या यह वाक्य सही है?* आप कहेंगे नहीं।स्कूटी जो जड़ पदार्थ है वो न तो सड़क पर चल सकती और न ही खाई में गिर सकती है।ड्राईवर की मर्जी वो सड़क पर चलाये या गढ्ढे में गिराये? फिर आप कहेंगे कोई अपनी गाड़ी गढ्ढे में क्यों गिरायेगा? इसका उत्तर है ड्राईवर की असावधानी या गल्ती से।बस यही बात यहां भी लागू होती है। *मन भी स्कूटी की तरह जीवात्मा का एक जड़ साधन है।जीवात्मा यदि ज्ञानवान है तो मन को ज्ञानकुंभ में लेकर जायेगा और मुक्त हो जायेगा।* यदि जीवात्मा ड्राईवर अज्ञानी है।अविद्या में है तो फिर वह गल्ती करेगा तब मन को जल में डुबकी लगाने को कहेगा।मन उदास है।निरास है।कहेगा।जबकि मन एक जड़ पदार्थ है।व्यवहार चलाने के लिए *जैंसे ड्राईवर कहता है स्कूटी खाई में गिर गयी जबकि सत्यता यह है कि स्कूटी गलत तरह से चलाने से खाई में गिरी।उसी प्रकार मन सुखी दुखी नहीं होता।जो कर्म कर्ता है वही सुखी दुखी होता है।आत्मा ही शरीर व मन से काम लेता है इसलिए सुखी-दु:खी भी चेतनआत्मा ही होता है जड़ शरीर व मन नहीं।*
मन विषय शरीर से अधिक सूक्ष्म है इसलिए आज इतना ही समझें।इसको बार-बार पढ़कर ज्ञानकुंभ में स्नान करें।कल फिर मन के बारे में इससे आगे जानेंगे!
क्रमश: ।
💐 *विशेष सूचना*💐
वाट्सप गुरुकुल पर चल रहे *ज्ञानकुंभ तीर्थ* में स्नान कर रहे तीर्थ स्नानार्थियों ने अपनी जो प्रतिक्रिया व्यक्त की है उसने यह बता दिया कि ऋषियों के वंशज आज भी हैं जो *महाकुंभ स्नान व ज्ञानकुंभ स्नान* के अंतर को भली प्रकार से जान रहे हैं।कुछ प्रतिक्रियाएं इस प्रकार हैं।
*[१]* माता जयवंती जी जनपद सांबरकांठा गुजरात से लिखती हैं।आचार्य जी में अधिक पड़ी लिखी नहीं हूं फिर भी आपकी वाणी को समझने के लिए पूरी शक्ति लगाती हूं।
*[२]* कृष्णकांत जी पदाधिकारी आर्य समाज सदर लखन ऊ से लिखते हैं।आचार्य जी इन लेखों को पौराणिक ग्रुपों में भेजना चाहिए जिससे सच्चाई लोग जान सकें और में आपसे इसकी आज्ञा चाहता हूं।
*[३]* विनोद कुमार उपाध्याय अनुराग लक्ष्य एवं नारद चर्चा समाचार पत्र के संपादक लिखते हैं।आचार्य जी मैं आपके लेखों को प्राथमिकता देता हूं और डंके की चोट पर छापता हूं।
*[४]* दह्यालाल रमानी गुजरात वालों ने ज्ञानकुंभ में स्नान करके आभार स्वरुप स्वेच्छा से प्रीति-पूर्वक २५११ रुपये की दान राशि आनलाईन भेजी है।
*[५]* उपेंद्र आर्य पदाधिकारी आर्य समाज रेलवे स्टेशन बस्ती लिखते हैं कि समस्त आर्य जन प्रतिदिन सायंकाल एकत्रित होकर ज्ञानकुंभ में सामूहिक स्नान करते हैं और इन लेखों की चिप बनाकर रेल-यात्रियों को बड़े बोर्ड पर सुनायेंगे।
*[६]* कमलेश कीमतानी प्रांतीज गुजरात से लिखते है मैं ज्ञानकुंभ के विचारों को गुजराती भाषा में भेजता हूं।
इतने कम समय में ज्ञानकुभं में स्नान करने वाले ऋषि पुत्रों ने ये बता दिया है कि *सत्य के ग्रहण व असत्य के छोड़ने में सदा उद्यत रहना चाहिए!*
आचार्य सुरेश जोशी
*वाटसप गुरुकुल महाविद्यालय* आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहरा -बाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश।