अयोध्या में श्रीराम कथा के पांचवें दिन भगवान के सगुण और निरगुण स्वरूप पर विस्तार से चर्चा

 

महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या । श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के तत्वावधान में अगंद टीला पर चल रही श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथा व्यास राधेश्याम शास्त्री महाराज ने भगवान के सगुण और निरगुण स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने श्रीराम चरित मानस के अनेक प्रसंगों को राष्ट्र और समाज के लिए अनुकरणीय बताया।
शास्त्री जी ने कहा कि श्रीराम कथा सर्वोच्च है और भगवान के चार गुण हैं – निरुगुण और सगुण। उन्होंने महाभारत के उदाहरण देकर समझाया कि कैसे भगवान श्रीकृष्ण ने अलग-अलग परिस्थितियों में अपने अलग-अलग स्वरूप प्रकट किए। शास्त्री जी ने धर्म की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि धर्म ही मनुष्य का वास्तविक मित्र है और धर्म की रक्षा के लिए ही भगवान श्रीराम का अवतरण हुआ था। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म अमर है और इस पर कभी संशय नहीं किया जा सकता।
कथा व्यास ने इस बात पर भी जोर दिया कि आज कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए झूठे समाजवाद का ढिंढोरा पीट रहे हैं। उन्होंने कहा कि असली समाजवाद तो रामायण और गीता में वर्णित है।