🌻🌻ओ३म् 🌻🌻
*अथर्वेद की पावन कथा*
🍁 वेद मंत्र🍁
*अष्टचक्रा नवद्वारा देवानां पूरयोध्या।*
*तस्यां हिरण्यय:कोश: स्वर्गो ज्योतिषावृता:।।*
अथर्वेद१०/२/३१
*अष्टचक्रा=* यम,नियम,आसन,प्राणायाम,प्रत्याहार,धारणा,ध्यान व समाधि इन आठों का क्रम रखने वाली। *नवद्वारा=* सात मस्तक के छिद्र+एक मन+एक बुद्धि रुपी नौ द्वार वाली। *पू=* देह पुरी *देवानाम्=* उन्मत्तों के लिए *अयोध्या=* अजेय है। *तस्याम्=* उस पुरी में *हिरण्यय:=* अनेक बलों से युक्त *कोश:=* भण्डार अर्थात् चेतन जीवात्मा *स्वर्ग:=* सुख स्वरूप परमात्मा की ऐर चलने वाला *ज्योतिषा=* ज्योति प्रकाश स्वरूप ब्रहम से *आवृता:=* छाया हुआ है।
🏔️ *कविता पाठ*🏔️
आठ चक्र और नौ द्वारों से सजी अयोध्या नगरी है।
मोक्षाभिलाषी बलवान आत्मा,प्रभु ज्योति से उभरी है।
🌸 *वेद कथा का छठा दिन*🌸
सत्यं हि प्रतिष्ठं ब्रह्म।ईश्वर सत्यवादी को ही अनुभव में आता है।जो सत्य का पालन नहीं करते उन्हें ईश्वर की प्राप्ति नहीं होती।
🪷 सत्य जिज्ञासा 🪷
*देश ,देव,धर्म,परिवार व आत्मरक्षा हेतु झूठ बोलना भी पाप में आता है?*
🌻 सम्यक प्रति-उत्तर🌻
ऐसी स्थिति में शास्त्रों में दो नियम काम करते हैं।आप किस नियम का पालन करते हैं ये आपके विवेक पर काम करता है।
*पहला नियम:-* झूठ तो झूठ है। वेद का मंत्र है कि !!हन्ति असद् तदन्तम्।।अर्थात् जो झूठ बोलता है परमात्मा उसको दंड देता है।। दूसरा मंत्र है।।सत्यं वक्ष्यामि नानृतम्।। अर्थात् मैं सत्य ही बोलुंगा,झूठ नहीं बोलुंगा।। इस प्रकार झूठ बोलने का कोई भी प्रावधान नहीं।।
*दूसरा अपवाद का नियम!* यह नियम आपातकाल में संस्कृति,राष्ट्र व समाज के हित में प्रयोग में लाया जाता है।राजधर्म में गुप्तचर विभाग में व आतंकियों को पकड़ने में झूठ को राजनीति की तरह प्रयोग में लाया जाता है।
मगर यह झूठ जिम्मेदार,महत्वपूर्ण शासक वर्ग के लिए है।आम व्यक्ति के लिए नहीं। मुमुक्षु के लिए नहीं।इसीलिए महाराजा जनक,महाराजा भतृहरि,योगेश्वर श्रीकृष्ण ने झूठ से बचने के लिए रासन्यास का मार्ग अपनायाजगद्दी को त्याग कर ।
🌼 *सत्य व महर्षि मनु*🌼
महर्षि मनु ने सत्य के बारे में चार बातें कही हैं।
*[१]* सत्यं ब्रूयात्। अर्थात् सत्य ही बोलें।यह प्राथमिकता है।
*[२]* प्रियं ब्रूयात् अर्थात् सत्य को मधुरता यानि शिष्टाचार के साथ बोलें।
*[३]* न ब्रूयात सत्यमप्रियम् अर्थात् सत्य को आवेश के साथ न बोलें।प्रिय बोलें।
*[४]* नानृतमब्रूयात्। अर्थात् झूठ किसी शर्त पर न बोलें!
*एष धर्म सनातन:* यही सत्य सनातन वैदिक धर्म कहाता है।
🍁 प्रबल जिज्ञासा🍁
*सत्यवादी दु:खी और अधर्मी फलते -फूलते दिखते हैं।*
🌹 सम्यक समाधान🌹
सुखी दिखना व सुखी होना दोनों में अंतर है। बड़े-बड़े करोड़पति महात्माओं से यह कहते हुए देखे व सुने जाते हैं कि *महाराज आप तो बड़े सुखी हैं।हम तो मायाजाल में फंसे हैं।* वास्तव में सुख भीतर की चीज है बाहर की नहीं।
बाहर आपको जो गगन चुंबी महल,गाड़ी,बंग्ले दिख रहे हैं ये *सुख नहीं सुविधाएं* हैं। भगत सिंह,पं०राम प्रसाद बिस्मिल,चंद्र शेखर आजाद जैंसे क्रांतिकारी युवक जेलों मे भी *वंदे-मातरम्* के गीत गुनगुनाते सुनाई देते हैं।श्री राम चंद्र जी जंगल में भी मंगल कर देते हैं।रावण महल में भी अशांत,विचलित व भटका रहता है। अत: जो दिखता है वो होता नहीं।जो होता है वो दिखता नहीं।सुख-दुख एक जन्मों का खेल नहीं है अपितु अनेक जन्मों का कर्म फल है।इसलिए यह सदा याद रहे कि सत्यमेव जयते।
*शेष चर्चा कल होगी*
आचार्य सुरेश जोशी
*प्रवासीय कार्यालय*
आर्य समाज मंदिर सैजपुर बोघा अहमदाबाद गुजरात।।