कहां है स्वर्ग ?-आचार्य सुरेश जोशी

🪔 *ओ३म्* 🪔
🪷 कहां है स्वर्ग ? 🪷
जन सामान्य में आज भी *स्वर्ग-नर्क तय* के बारे में बड़ी भ्रांति है।लोग कहते हैं स्वर्ग ऊपर है।पूछो मिलेगा कब? तो उत्तर देते हैं मरने के बाद!
आज मैं आपको वैदिक शास्त्रों के आधार बताता हूं कि *स्वर्ग इसी दुनियां में हैं और जीते जी मिलता है।* न कोई स्वर्ग-नर्क ऊपर है न ही मरने के बाद मिलता है। कुल ११लक्षण हैं स्वर्ग के जहां ये लक्षण मिल जाए समझो उसी परिवार में स्वर्ग है आप वहां जाकर देख लीजिएगा *आपको स्वर्ग का साक्षात्कार* हो जायेगा!
*स्वर्ग का प्रथम लक्षण*
[१] 🌹 सानन्दं सदनम्🌹 जिस घर में प्रवेश करते ही आनन्द की अनुभूति होने लगे।घर के लोग संध्या,यज्ञ,स्वाध्याय करते दिखाई दे वो घर स्वर्ग है।
*स्वर्ग का द्वितीय लक्षण*
🌹सुताश्च सुधय:🌹 पुत्र/पुत्रियां बुद्धिमान हो! पुत्र एक हो गुणी हो न क ई मूर्ख पुत्र।जैंसे ही चंद्रमा अंधकार को दूर करता है न कि सैंकड़ों टिम टिमाते तारे!
*स्वर्ग का तीसरा लक्षण*
🌹कांता प्रियालापिनी🌹कांता कहते हैं पत्नी को।पत्नी मधुर भाषिणी हो।जहां पाणि व वाणी ठीक हो उस घर में स्वर्ग होता है।झूठ,निंदा,कठोर व वकवास वाणी के दोष हैं।
*स्वर्ग का चौथा लक्षण*
🌹सन्मित्रम्🌹अच्छे मित्रों का मिलना।जो व्यक्ति मित्र के दुख में दुखी व सुख में सुखी नहीं होता ऐसे व्यक्ति की मित्रता तुरंत छोड़ देनी चाहिए।
*स्वर्ग का पंचम लक्षण*
🌹सुधनम्🌹 जिसके घर में पुरुषार्थ से धन आता हो।जिसका धन यज्ञ,सत्संग,परोपकार,देश-धर्म -संस्कृति व राष्ट्र हित में लगता है वही सुधन है बांकी लोग तो धनी होते हुए भी निर्धन हैं।
*स्वरग का छठा लक्षण*
🌹स्वयोषिरति🌹जिस घर के पुरुष केवल अपनी ही पत्नी में अनुराग रखते हैं।शेष को *माता-बहन-पुत्री* की दृष्टि से देखते हों वही घर स्वर्ग हैं।
*स्वर्ग का सातवांलक्षण*
🌹आज्ञापराश्च सेवका:🌹सेवक यदि मौन रहता है तो मालिक उसे गूंगा कहता है।स्वामी से चिपका रहता है तो लोग उसे दब्बू कहते हैं।सहनशील नहीं तो नीच कुल का मानते हैं।अत:जिन घरों के सेवक आज्ञाकारी हों वे ही घर स्वर्ग समान हैं।
*स्वर्ग का आठवां लक्षण*
🌹आतिथ्यम्🌹जिन परिवारों में विद्वानों का आना-जाना न हो!जहां सज्जनो का संगम न हो वहां दुख:ही दुख होता है।यदि हम अभ्यागत का स्वागत नहीं करेंगे तो हमारे यहां सज्जनों का आना-जाना बंद हो जायेगा।
*स्वर्ग का नवां लक्षण*
🌹शिवपूजनम्🌹जिन घरों में सध्या,ओ३म् व गायत्री का जाप एवं यम नियम सहित अष्टांग योग का पालन होता है वो घर स्वर्ग समान हैं।
*स्वर्ग का दशवां लक्षण*
🌹मिष्टान्न पानं गृहे🌹जहां पाकशाला में बना बन प्रसाद की तरह मधुर व सात्विक हो उस घर में स्वर्ग है।
*स्वर्ग का ग्यारहवां लक्षण*
🌹साधो:संगमुपासते🌹 संतों का संग औषधि का काम करती है।दूसरों के घर झाड़ू लगाने से अपना घर साफ नहीं होता।अत:वैदिक विद्वानों को बुलाकर जो अपने घर के अज्ञान का कूढ़ा-करकट करते हैं वहां स्वर्ग है।
शास्त्रकार कहते हैं जिन घरों में ये *ग्यारह लक्षण* दिखाई दें वो घर आज के युग के *स्वर्ग लोक* हैं विद्वान कहते हैं *🪔धन्यो हि गृहस्थाश्रम*🪔 ऐंसे घर व गृह्स्थी धन्य हैं।आर्य समाज इंदिरा नगर सेक्टर में *महिला सम्मेलन में गृह्स्थ आश्रम ज्येष्ठ व श्रेष्ठ* इस विषय पर ये चिंतन दिया गया।अन्य विद्वानों ने भी अपने विचार अभिव्यक्त किए।कार्यक्रम का संचालन *इंजीनियर श्रीमती कांति कुमार* जी ने किया।
आचार्य सुरेश
*🏵️वेदिक प्रवक्ता*🏵️आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहरा बाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश☎️ *७९८५४१४६*☎️