

,
अनुराग लक्ष्य,16 अगस्त
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता।
स्वतंत्रता दिवस की शाम आज उस वक्त देश भक्ति पूर्ण रचनाओं से सराबोर हो गई। जब धारावी के एक्सपर्ट क्लासेज के सभागार में देश के मशहूर ओ मारूफ शोअरा हज़रात एक के बाद अपने म्यारी कलाम को सुनकर समयीन के दिलों में उतर गए।
मुशायरे की सदारत उर्दू अदब की मशहूर ओ मारूफ शख्सियत जनाब डॉक्टर कासिम इमाम साहब ने की। बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे जनाब हामिद इकबाल सिद्दीकी साहब।
मुशायरे के नाज़िम जनाब मज़ा हिर जाफरी ने सबसे पहले आवाज़ दी, शायर ताहिर अंसारी को, उन्होंने अपना कलाम,
,आसनियों से इश्क की तकमील हो के अब
उल्फत में रह कि आबले पांव का का दौर खत्म,
सुनाकर मुशायरे का आगाज़ किया। तदुप्रांत शायर शमीम दानिश ने अपना कलाम,
, मेरी हस्ती का खरीदार नहीं है कोई,
क्या यहां मिस्र का बाज़ार नहीं है कोई,
सुनाकर खूब दाद ओ तहसीन हासिल किया। इसी क्रम में शायर ज़ाकिर अहमद ज़ाकिर ने अपना म्यारी कलाम,
, आंखों के जज़ीरों पर नीलम की कतारें
ख्वाबों का जनाज़ा है उठाना तो पड़ेगा, सुनाकर मुशायरे को ऊंचाई परदान की।
इसी फेहरिस्त में अपने खास अंदाज में पढ़ने वाले शायर सलीम बस्तवी अज़ीज़ी ने ,
जिसका बेटा लड़ते लड़ते मुल्क पे हो जाता है शहीद
बरसों उसके ग़म का सहना अच्छा लगता है
हम हैं हिंदुस्तानी कहना अच्छा लगता है,
सुनाकर देश के शहीदों को श्रृद्धा सुमन अर्पित किया और साम यीन के दिलों में उतर गए।
इसी क्रम में मशहूर ओ मारूफ शायर डॉक्टर ओबैद आज़म आज़मी ने दर्जनों मेयारी कलाम सुनाकर मुशायरे को एक नई ऊंचाई परदान की, उनका कलाम,
,, ऐसी तहरीर का उनवान नहीं होता है
खैरियत लिखना आसान नहीं होता है,, और
,,हम चल पड़े तो काफिला बनता चला गया,, विशेष रूप से सराहा गया।
मुख्य अतिथि जनाब हामिद इकबाल सिद्दीकी ने अपने खास लब ओ लहजे में खूबसूरत नज़म से उपस्थित सभी श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, उनका कलाम,
,,, खुली बारिश में तुम्हारी यह जुल्फें घटा बन गईं, सबा बन गईं, वोह सपना नहीं था, तुम्हीं थी नज़र में,,,
इसी क्रम में डाक्टर कमर सिद्दीकी ने अपने कलाम से समायीन के दिलों में उतर गए, उनका कलाम,
,,हैं साथ और साफ बयानी के साथ हैं
हम प्यास की तरफ हैं वोह पानी के साथ हैं, और इसी के साथ उनका यह भी कलाम, खूब रहा,
,,हम अगर सोई हुई यादें जगाने लग जाएं
नींद के आने तक ज़माने लग जाएं,,
और आखिर में सदारत कर रहे उर्दू अदब के जाने माने शायर जनाब डॉक्टर कासिम इमाम साहब ने कई मयारी कालम से खूब दाद ओ तहसीन हासिल की,
उनका कलाम,
,, बेकरां है ज़िंदगी थोड़ी राहत चाहिए
आपके कूचे में रहने की इजाज़त चाहिए
कोहसारों से उतरते आबशारों की कसम
सूरह ए रहमान में सब है तिलावत चाहिए,,
मुशायरे की नेजामत को बखूबी अंजाम दिया नौजवान शायर मजाहिर जाफरी ने। मुशायरे को कामयाब बनाने में धारावी के
गडमान्य लोगों के साथ समायीन हजरात का योगदान सराहनीय रहा। मुशायरे के अंत में आयोजक मुहम्मद अहमद साहब ने अभी मेहमान शोअरा और शोरोताओं का आभार और शुक्रिया अदा किया।x