🍁 *ओ३म्*🍁
📚 ईश्वरीय वाणी वेद 📚
🌹 वैदिक परिवार 🌹
*ओ३म् अनुव्रत:पितु पुत्रो माता भवतु संमना:। जाया पत्ये मधुमतीं वाचन वदतु शन्तिवाम्।।*
☘️ *मंत्र का पदार्थ*🍀
🍇 पुत्र:= पुत्र 🍇 पितु:= पिता का 🍇 अनुव्रत: = फौलोवर हो। 🍇 माता = पुत्र माता के साथ 🍇 संमना= उत्तम मन वाला हो ! 🍇 जाया= पत्नी को चाहिए कि वह 🍇 पत्ये = पति के साथ 🍇 मधुमतीम् = मधुर और 🍇 शन्तिवाम् = शान्तिप्रद 🍇 वाचम् = वाणी 🍇 वदतु = बोले।
🍐 *मंत्र की मीमांसा*🍐
ईश्वर ने मानव को * *परिवार में कभी भी वार* न हो उसके चार सूत्र दिए हैं।
[१] पुत्र पिता का फौलोवर बने !
[२] माता के मन को मान देने वाला हो!
[३] पत्नी पति से मधुर
भाषा में संवाद करें!
[४] पति को घर में रहना,सहना व कहना आ जाए।
बुद्धिमान पिता कभी भी बहुत छोटे बालकों पर उनकी व्यवस्था का भार नहीं छोड़ता है। दूसरी ओर *विद्वान और परिपक्व सन्तान अपना विधान* अपने आप बनाने में स्वतंत्र होती है।
🥥 *क्यों मानें? पिता को?*🥥
आज की भौतिक वादी नस्लें यह कुतर्क कर सकती हैं कि *बेटा बाप की आज्ञा क्यों मानें?* इसका उत्तर शतपथ ब्राह्मण में दिया है कि …… ….
*कृतंलोकं पुरुषोऽभिजायते।* अर्थात् पुरुष जैसा लोक अपने लिए बनाता है वैंसा ही लोक उसको दूसरे जन्म में प्राप्त होता है। समाज में क ई पिता को ऐसा कहते सुना जाता है कि मैंने अपने पिता की उपेक्षा की उसी का जबाब मेरा पुत्र मुझे दे रहा है। यदि हमारी संतान की भूलों से *वैदिक परम्पराएं नष्ट* हो गई तो हम ऐसी दुनिया में जन्म लेंगे जो *अवैदिक और प्रतिकूल* होंगी।
🌸 *मात्रा भवतु संमना*🌸
माता प्रेम की निधि है। अतः माता का कृतज्ञ होना ही मनुष्य के *आत्म निर्माण* की पहली सीढ़ी है। जिसने माता का सम्मान करना सीख लिया मानो उसने *ईश्वर प्रेम का ऋण* चुका दिया।
पत्नी का समझदार होना उसके पतिधर्म की पराकाष्ठा है क्योंकि *पुरुष स्वभाव से कठोर* होता है दुनिया में पत्नी ही ऐसी है जो उसे सामंजस्य स्थापित करना सिखा सकती हैं। *पुरुष दांत+पत्नी भीम = मुख तो फिर मुखिया मुख* सा बन जाता है।
अंत में जो पत्नी की पत रखें वहीं तो है *पतिदेव* जैसा परमात्मा सृष्टि के प्राणियों की रक्षा। जैसे माता-पिता संतानों की रक्षा करते हैं वैसे ही *पति पत्नी की रक्षा* का बचन विवाह में देता है उसे सुनकर *बराती व घराती दोनों कहते हैं 🍍वाह!वाह!!🍍* बस इसी का तो नाम है विवाह। यदि हम ईश्वरीय वाणी वेद 📚 की बात को आत्मसात कर लें तो हमारे घर स्वर्ग बन जायेंगे!
आचार्य सुरेश जोशी
*वैदिक प्रवक्ता*