ईश्वरीय वाणी वेद 📚-आचार्य सुरेश जोशी

🌳 *ओ३म्*🌳
📚 ईश्वरीय वाणी वेद 📚
*विश्व पर्यावरण दिवस*
विश्व पर्यावरण दिवस पर चिंतन देने से पहले इस बात पर चिंतन करना जरूरी है कि 🌾 पर्यावरण 🌾 है क्या ? *परि = हमारे चारों ओर जो आवरण यानि सुरक्षा चक्र है उसका नाम है पर्यावरण* अब प्रश्न है कि हमारे चारों ओर है क्या ? इसका उत्तर है आकाश,वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी है। इनके संगठन का नाम है *पर्यावरण* आज जो हमारे चारों का पर्यावरण है वो दूषित है। जिसमें। *ग्लोबल वार्मिंग* सबसे बड़ि समस्या है। हमने विशेष कर *जल और पृथ्वी* का सर्वाधिक दोहन किया है जिसका परिणाम सामने है कि 🕳️ अतिवृष्टि -अनावृष्टि, ग्लेशियर का गिरना। नोतपा से पीड़ित प्राणि वर्ग 🕳️
इसका मूल कारण है अपनी *सत्य सनातन संस्कृति के आधार ईश्वरीय वाणी वेद* की उपेक्षा।
वेद समस्त सत्य विद्याओं व ज्ञान -विज्ञान का विपुल भंडार है। मगर लोगों ने उनके अर्थों को विकृत कर दिया। वेदों में राम -कृष्ण के नामों की चर्चा अयोध्या व वृंदावन धाम की महिमा दिखाकर वेदों को लोगों ने *गड़ेरियों के गीत* बनाकर रख दिया। सत्यता यह है कि वेद में किसी पुरुष, अयोध्या आदि स्थानों का इतिहास है ही नहीं *वेद हिंदुओं का धर्म ग्रंथ है* यह एक बड़ी भ्रांति है। सत्यता यह है कि *वेद मानवता का ग्रंथ है सबको मानव बनने की प्रेरणा देता है। स्त्री पुरुष सभी वेदों को पढ़ व पढ़ा सकते हैं*
सब सत्य विद्याओं में 🌴 पर्यावरण 🌴 भी एक सम-सामयिक विषय है। वेदों में इस विषय पर *सृष्टि उत्पत्ति के समय ही विस्तार से समझाया* गया है। पर्यावरण संबंधी आवश्यक शिक्षा के कुछ अंशों पर हम चिंतन करते हैं।
*ओ३म् नमो मात्रे पृथिव्यै नमो मात्रे पृथिव्यै।कृष्यै त्वा क्षेमाय त्वा रथ्यै त्वा पोषाय त्वा।। यजुर्वेद ९/२२*
अर्थात् हे पृथ्वी! हे वाटिके!तेरी गोद में स्थापित और तुझसे उत्पन्न ये धान्य -शाक -वृक्ष सब हमारे लिए आरोग्य कारक और कीट रहित हों। ये कभी सड़े गले न हों , इनको कभी कीड़ा न लगे!
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*ओ३म् स्योनं ध्रुवं प्रजायै धारयामि तेऽश्मानं देव्या: पृथिव्या उपस्थे। तमातिष्ठानुमाद्या सुवर्चा दीर्घं त आयु: सविता कृणोतु।। अथर्ववेद १४/१/४७*

अर्थात् बीज,पत्थर की नाई स्थिर जमने वाला होना चाहिए।जो छोटे से बढ़ा है और फिर विस्तार को प्राप्त हो।
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*ओ३म् युनक्त सीरा वि युगा तनोत कृते योनौ वपतेह बीजम्। विराज: श्नुष्टि सभरा असन्नो नेदीय इत् सृण्य: पक्वमा यवन्। अथर्ववेद ६/१०/४*
अर्थात् हे विराजमान किसानो!इस भूमि पर हलों को जोतो, जुओं को फैलाओ, क्यारियां बनाकर यहां बीज बोओ,पौंद लगाओ,तुम्हारी अन्न की उपज भरपूर होते,और फिर हंसुए -दरातियां पकी फसल को प्राप्त करें,कांटे।
इस प्रकार अनेकों मंत्र वेद में है जहां पर मानव को *कृषि, बागवानी, उद्यान* लगाकर पर्यावरण संरक्षण पर काम करने की प्रेरणा दी गई है।
वेद के अतिरिक्त अन्य स्थलों पर *बन संरक्षण* को प्राथमिकता दी गई है। श्रीराम चरित मानस में *पर्यावरण का अंलकारिक वर्णन अप्रतिम है।जरा देखें!*
*पीपल तरु तर ध्यान जो धरहीं।*
*जाप जग्य पाकर तरु करहीं।*
*आम छांह करि मानस पूजा तजि हरि भजन काज नहि दूजा।।*
अर्थात् कल्याण चाहने वाले मनुष्यों को *पीपल के वृक्ष के नीचे ध्यान* यज्ञ एवं जप का अनुष्ठान *पाकर वृक्ष* के नीचे और जिसको तनाव अधिक रहता है वो *आम के पेड़ के नीचे बैठकर आत्मचिंतन* करें ! यह भारत के महापुरुषों की अद्भुत खोज व प्रकृति प्रेमी होने के। *प्रत्यक्ष व आप्त प्रमाण* है।
🌲 *सार तत्व देखें*🌲
भारत सरकार को चाहिए कि जो धन मंदिरों के निर्माण में लग रहा है यदि उसे *ईश्वरीय वाणी वेद* के अनुसंधान में लगा दे तो हम बहुत ही कम समय में *प्रकृति को महा-विनाश* से बचा सकते हैं। वैदिक अनुसंधान शालाओं में प्रतिदिन पर शौध कार्य होने चाहिए।
*एक ताल -पोखरों का जीर्णोद्धार, कुओं को पुनर्जीवित करना, शत् प्रतिशत वृक्षारोपण एवं उनके संरक्षण व संवर्धन का संकल्प, वृक्षारोपण सचल अभियान।बन संपदा का संरक्षण। अवैध खनन पर रोक।पक्षी विहारों का नव -निर्माण। पशुपालन की वृद्धि के साथ गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध के साथ किसी प्राणी की हत्या पर शत-प्रतिशत रोक* लगाकर धरती माता।गंगा माता।गो माता व वेदमाता की सुरक्षा हो।तभी 🌳 *विश्व पर्यावरण दिवस 🌳* को मनाना सफल हो सकता है।
*वृक्ष लगाना पुण्य महान।*
*एक वृक्ष दश पुत्र समान।।*
आचार्य सुरेश जोशी
🏵️ वैदिक प्रवक्ता 🏵️

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