याद आपकी आती है तो ,सौतन बन तड़पाए हिचकी
लाख जतन कर लूँ साजन जी, आए तो बस आए हिचकी
मैं जोगन बनकर फिरती हूँ, तुम चौखट पर आते हो जब
उलझी उलझी जुल्फों को , हौले से सुलझाते हो जब
मौन निमंत्रण स्वीकारो प्रिय ,सच में बहुत सताए हिचकी
लाख जतन कर लूँ साजन जी, आए तो बस आए हिचकी।
जब सोलह श्रृंगार करूँ तो, नयनों में अंजन बन जाना
नाज़ुक नाज़ुक इन बाहों में, बलखाते कंगन बन जाना
जब सिंदूरी मांग भरूं तो ,दिल में अगन लगाए हिचकी
लाख जतन कर लूँ साजन जी ,आए तो बस आए हिचकी।
माना कुछ मज़बूरी होगी , प्रणयआस कब पूरी होंगी
कृष्ण बिना जैसे थी राधा , साँसें मेरी अधूरी होंगी
मन मंदिर के वृन्दावन में , बंसी बहुत बजाए हिचकी
लाख जतन कर लूँ साजन जी आए तो बस आए हिचकी
याद आपकी आती है तो सौतन बन तड़पाए हिचकी
लाख जतन कर लूं साजन जी आए तो बस आए हिचकी
डॉ॰ उषा श्रीवास्तव ‘उषाराज ‘
गाज़ियाबाद, उत्तर प्रदेश
स्वरचित