ग़ज़ल
जीस्त में ऐसी भी डगर आई।
मौत जैसे हो मेरे सर आई।।
उसकी जानिब जो थी हवा कल तक।
वक्त बदला तो वो इधर आई।।
दिल की बगिया में फूल खिलने लगे।
उसके आने की जब ख़बर आई।।
खिलखिलाता है इक सफेद गुलाब।
चांदनी फूल में उतर आई।।
मिल गई आ के इक समुन्दर से।
वो नदी आज अपने घर आई।।
तेरी यादों में घूम आया मैं।
ज़िंदगी कर के इक सफ़र आई।।
जाने क्या याद आ गया हर्षित।
यक ब यक आंख मेरी भर आई।।
विनोद उपाध्याय हर्षित