🌹 ओ३म् 🌹
🌴 विश्वविद्यालय में वेद🌴
महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के तत्वावधान में एक🍁 वैदिक सेमिनार🍁 आयोजित किया गया। जिसमें वेदों के आधार पर 🌻 सफलता के स्वर्णिम सूत्र 🌻इस विषय पर आचार्य सुरेश जोशी वैदिक प्रवक्ता बाराबंकी ने सर्वप्रथम वेद की पावन ऋचा का🕉️ ओ३म् 🕉️नाद के साथ उच्चारण किया।
ओ३म् व्रतेन दीक्षामाप्नोति।दीक्षयाप्नोति दक्षिणाम्। दक्षिणाश्रद्धामाप्नोति ।श्रद्धया सत्यमाप्यते।।
इस पर विचार देते हुए आचार्य श्री ने बताया कि मानव में संकल्प शक्ति के जागृत होते ही 🌸 योग्यता 🌸 ज्ञान 🌸 दक्षता 🌸 श्रद्धा 🌸 सत्य 🌸 की प्राप्ति होती है। सत्यमेव जयते। जिसने सत्य को अपनाया उसी की विजय होती है।
विश्व विद्यालय के छात्र/छात्राओं को संबोधित करते हुए आचार्य श्री ने बताया कि उपरोक्त गुणों को आत्मसात करने के लिए शिक्षार्थियों को छ: बातों को आचरण में लाना अनिवार्य है।
[१] 🌴 लक्ष्य निर्धारण 🌴
यदि आपके जीवन का कोई लक्ष्य नहीं है तो आपकी डिग्रियां आपके लिए बोझ हो जायेंगी। यदि रोटी,कपड़ा मकान ही आपने शिक्षा का लक्ष्य बनाया है तो यह निम्न स्तर को सोच है क्योंकि एक मजदूर बिना शिक्षा प्राप्त किए ही रोटी कपड़ा मकान प्राप्त कर लेता है। इसलिए शिक्षा की सफलता के लिए लक्ष्य का होना अनिवार्य है।
[२]🌴 माता-पिता आचार्य की सेवा🌴
जिस शिक्षा में संस्कार नहीं वह शिक्षा मानव को पशु बना देती है। अतः हर शिक्षित युवा का कर्तव्य है कि वो अपने माता-पिता आचार्य की सेवा करें अर्थात इनकी आज्ञाओं का पालन और इनके प्रति अपार श्रद्धा रखकर इनके आशीर्वाद अवश्य प्राप्त करें।माता पृथ्वी से भारी और पिता आकाश से भी ऊंचा है तथा आचार्य शव युक्त शरीर को 🧘शिव🧘 बना देता है।
[३] 🌴ईश्वर भक्ति करो🌴
माता केवल माता होती है।पिता केवल पिता होता है। आचार्य केवल आचार्य होता है मगर ईश्वर 🌾 माता-पिता आचार्य 🌾 तीनों होता है।
ईश्वर शब्द नहीं जो पुस्तक में मिलेगा। ईश्वर मूर्ति नहीं जो मंदिर में मिलेगा। ईश्वर चित्र नहीं जो दीवार में लटकेगा। ईश्वर जीवन है जो मन मंदिर में मिलेगा। ईश्वर भक्ति से मानव में आत्मबल आता है। आत्मबल संसार का सबसे बड़ा बल है।
[४]🌴 राष्ट्र भक्त बनो🌴
राष्ट्र हमें सुरक्षा -सुविधा व साधन देता है। जननी व जन्मभूमि तथा भाषा -भूषा राष्ट्र के प्राण है। हमें राष्ट्र के लिए बलिदान देने को हमेशा तैयार रहना चाहिए।
जो भरा नहीं है भावों से बहती जिसमें रसधार नहीं।वह हृदय नहीं है पत्थर है जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।
[५]🌴समय को पहचानो🌴
समय धन संसार का सबसे बड़ा व अमूल्य धन है। इसलिए जीवन में महान बनने के लिए समय विभाजन आवश्यक है। भोजन,शयन, अध्ययन, मनोरंजन में यदि समय की उपेक्षा कि ग ई तो आप जीवन की दौड़ में पीछे रह जाओगे।आज दुनिया में जिनके भी इतिहास बनें उन्होंने समय को ईश्वर की तरह पूजा है तभी सफलता प्राप्त हुई है।
समय पै जो जाति संभलती नहीं है।
कभी उसकी हालत बदलती नहीं है।
[६]🌴 श्रद्धावान बनो🌴
माता-पिता आचार्य ईश्वर,धर्म, कर्तव्य कर्म सारे काम श्रद्धा पूर्वक करने चाहिए। क्योंकि विपरीत परिस्थितियों आपको लक्ष्य से भटकाती हैं। यदि आपके पास श्रद्धा की ढाल है तो समरभूमि में अवश्य ही विजय श्री को प्राप्त होंगे। वैदिक ऋषियों का कहना है 🌿 श्रद्धां विन्दते वसु 🌿 अर्थात् श्रद्धा से ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है।ये छः गुण जिस विद्यार्थी में होंगे उसे सफल होने से दुनिया की कोई ताकत नहीं रोक सकती।
सोच बदल दो तो सितारे बदल जायेंगे।
नज़र बदल तो नज़ारे बदल जायेंगे।
कश्तियां बदलने की जरूरत नहीं मित्रों
दिशा बदल तो किनारे बदल जायेंगे।
🌸 कार्यक्रम प्रेरणा स्रोत 🌸
सचिन आर्य आर्य समाज बरेली
🌸 कार्यक्रम संचालित 🌸
प्रोफेसर तूलिका सक्सेना
आचार्य सुरेश जोशी
🪷 वैदिक प्रवक्ता 🪷
आर्यावर्त साधना सदन पटेल नगर दशहराबाग बाराबंकी उत्तर प्रदेश ☎️ 7985414636☎️