आज आघात फिर मन को ऐसा लगा,
याद फिर आज भी आपकी आ गई।
बात थी दूसरे की किसी बात पर,
बात में बात ही आपकी आ गई।
गंध आयी कहीं से किसी और की,
फूल का चित्र मन में लगा तैरने,
पन्थ चलने का करने लगा आग्रह,
याद काँटों की भेजी मुझे पैर ने ।
सबको सूरज दिया देने वाले ने पर,
भाग्य मेरे बची रात ही आ गई।
बात थी दूसरे की किसी बात पर,
बात में बात ही आपकी आ गई।
देखकर घाट नदियों के टूटे हुए,
एक दिन आंसुओं ने यूँ मुझसे कहा,
दिन बदल लेता है भाग्य का चन्द्रमा,
रोशनी पर सदा हक़ भी किसका रहा ?
भीग लेता मैं कल आंसुओं से ही पर,
आज बरसात ही आपकी आ गई।
बात थी दूसरे की किसी बात पर,
बात में बात ही आपकी आ गई।
रंग चेहरे से उतरा उतारे बिना,
भावनायें हुई होलिका में दहन,
रंग बदला हुआ देखकर आपका,
लौट आया नया एक चेहरा पहन।
टूटने के लिया दिल तो था ही मेरा,
उसपे सौग़ात ये आपकी आ गई।
बात थी दूसरे की किसी बात पर,
बात में बात ही आपकी आ गई।
#priyanshugajendra