तीन तरह के मनुष्य -आचार्य सुरेश जोशी

🌲🌲 ओ३म् 🌲🌲
🥝 तीन तरह के मनुष्य 🥝
आर्य समाज मंदिर गांधी नगर बस्ती के १०५ वें वार्षिकोत्सव पर देव यज्ञ की व्याख्या में 🧘 तीन प्रकार 🧘 के मनुष्यों की चर्चा की गई।
🏵️ प्रथम-ऋषि कोटि 🏵️
ऋषि कोटि में वो मानव आते हैं जो स्वार्थ रहित होकर सबके लिए काम करें और स्वयं का कुछ भी प्रयोजन न हो।
🏵️ द्वितीय -मानव कोटि 🏵️
मनुष्य उसे कहते हैं जो अन्यों की भलाई के साथ स्वयं का भी स्वार्थ सिद्ध करता हो, अर्थात् मैं भी सुखी रहूं और भी सुखी रहें।
🏵️ तृतीय -राक्षस कोटि 🏵️
वह मानव जो जो केवल अपना भला सोचें।दूसरे की हानि-लाभ का विचार ही न करें।
पहला मानव उत्तम,दूसरा मध्यम ,तीसरा अधम कहलाता है।उत्तम वो ही मनुष्य बनते हैं जो यज्ञ करते हैं। इसलिए हर मानव को यज्ञ करते हुए ऋषि बनना है तभी ऋषि ऋण से उऋण हो सकेंगे।
वैदिक भजनों की श्रृंखला में पंडित नेम प्रकाश जी आधुनिक अर्जुन व पंडिता रुक्मिणी जोशी वैदिक भजनोपदेशिका बाराबंकी द्वारा भजन व उपदेश दिया गया।
🌼 आज के प्रतिष्ठित यजमान
[१] श्रीमती सुनीता मेंहदीरत्ता।
श्रीमान वेद बाबू जी।
[२] श्रीमती चंद्रकला दूबे।
श्रीमान गिरजा शंकर दूबे
प्रधान आर्य समाज लालगंज।
[३] श्रीमती सरिता मोदनवाल।
श्रीमान आशुतोष मोदनवाल।
[४] श्रीमती कलावती जी।
श्रीमान सुरेन्द्र शर्मा जी।
[५] श्रीमती ऋचा मेंहदीरत्ता।
[६] श्रीमान उपेन्द्र शर्मा जी।
🍁🍁 बाल यजमान 🍁🍁
ब्रह्मचारिणी वेदांशी मेंहदीरत्ता।
आचार्य सुरेश जोशी
वैदिक प्रवक्ता 🌻

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