अनुराग लक्ष्य, 11मार्च
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
कितने खुशकिस्मत हैं वोह लोग जिनकी ज़िन्दगी में एक बार फिर यह मुकद्दस महीना आया है और वो खुदा की दी हुई नेमतों का हिस्सा बनेंगे। यही वोह मुकद्दस महीना है जिसमें पूरा कुरआन उतारा।
हज़ारों लाखों करोड़ों नेमतों का यह मुकद्दस महीना रमज़ान अपने आप में इतनी फजीलत रखता है जिसको कलमबंद करना बहुत मुश्किल है । रवायतों की मानें तो आपको इस महीने को बड़ी ही अकीदत और मुहब्बत के साथ अपने रब को मानने का एक बहुत ही सुनहरा मौका मिला है जिसमें आप अपने रोजों और तरावीह की नमाज़ो से अपने रब का कुर्ब हासिल कर सकते हैं।
माह ए रमज़ान की खास दुआओं का एहतमाम भी करना चाहिए। जिसमें पहले 10 दिन का रहमत का अशरा है। दूसरा 10 दिन का अशरा मगफरत का है और तीसरा 10 दिन का अशरा नेजात का है। जिसे मुकम्मल करके बनदा अपने रब के करीब हो जाता है। साथ ही जन्नत का मुस्ताहक भी।
मस्जिदें सजने लगी हैं, रोजेदार रोज़े की ज़रूरतों को पूरा करने में मसरूफ दिखाई दे रहे हैं जो आज चांद दिखने के साथ कल से पहला रोज़ा मोमिनों पर फर्ज़ हो जायेगा।