या खुदा हाथ दिए हैं तो हुनर भी देना – रूपेंद्र नाथ सिंह रूप

या ख़ुदा मेरी दुआओं में असर भी देना।
सच को पहचान सकूं बस वो नज़र भी देना।

कुछ नहीं हमको ख़बर गांव की तुम्हारी भी।
गांव के साथ ही कुछ अपनी ख़बर भी देना।

अपने कुनबे के लिए रोज़ कमा लूं रोटी।
या ख़ुदा हाथ दिए हैं तो हुनर भी देना।

प्यार का रोग अगर दिल को लगाया है तो।
प्यार की रीत निभाने का ज़िगर भी देना।

ग़म की रातों का गिला हमको नहीं है कुछ भी।
रात लम्बी है मगर इसकी सहर भी देना।

जब भी सागर को खंगाला तो मिले कंकर ही।
हो सके रब जी तो इकबार गुहर भी देना।

काम ऐसा न करूं जिससे ख़फ़ा रब होवे।
हर घड़ी रूप मेरे मन में ये डर भी देना।

रूपेंद्र नाथ सिंह रूप

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