अनुराग लक्ष्य, 22 जनवरी,
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,
मुम्बई संवाददाता ।
,,,,, कहा था कृष्ण ने अर्जुन से जो वोह याद करो
मुझमें गीता का वही सार अभी बाकी है
जिस तरह कर दिया था राम ने अहिल्या का
उस तरह मेरा भी उद्धार अभी बाकी है,,
अगर आप उपरोक्त चार पंक्तियों की गहराई में जाएं तो यह साबित हो जाता है की मर्यादा पुरुषोत्तम राम तो समस्त मानव जीवन के लिए एक संजीवनी की तरह महेकते रहे। उनके आदर्श , परा करम, वीरता और त्याग को जो भी नकारेगा वोह किसी भी तरह राम का सच्चा भक्त नहीं हो सकता। क्योंकि हम जिस मर्यादा पुरुषोत्तम राम को पढ़ते आए हैं और सुनते आए हैं। वहां से एक ऐसा चरित्र और बुलंद किरदार दिखाई पड़ता है, जहां से समस्त मानव जीवन को एक ऐसा रास्ता परशस्त होता हुआ दिखाई देता है । जहां प्रेम है, विश्वास है, त्याग है, बलिदान है, साथ ही समस्त श्रृष्टि के लिए मानवता का ऐसा संदेश जाता है। जिसमें सुख है, समृद्धि है और सबका कल्याण है। दुनिया में ऐसा मिसाल देखने को नहीं मिलता हम सब मिलकर समाज में रहे यही राम का संदेश है।