जन मानस के उर अंतस में आशा दीप जलाये हैं।। प्रतिभा गुप्ता

राम नाम की गूँज उठी है राम अवध में आये हैं।
जन मानस के उर अंतस में आशा दीप जलाये हैं।।

पुरुषोत्तम के भाल सजेगा सुंदर मुकुट निराला अब,
भारत का सौभाग्य-दिवाकर पुनः निकलने वाला अब।
भाग जगे हैं माँ सरयू के लहरें खुशी जताये हैं,
राम नाम की गूँज उठी है राम अवध में आये हैं।।

वर्ष पाँच सौ बाद राम, कौशल्या-आँचल खेलेंगे,
निज भक्तों के कष्ट सभी अपने चरणों में ले लेंगे।
स्वागत में सज गयी अयोध्या जन गण मन हरषाये हैं,
राम नाम की गूँज उठी है राम अवध में आये हैं।।

खा करके सौगंध राम की जिसने प्राण गवाये हैं,
राम लला को लाने में निज जन्मभूमि बिसराये हैं ।
पूरी हुयी तपस्या मन की नयन अधर मुस्काये हैं,
राम नाम की गूँज उठी है राम अवध में आये हैं।।

–प्रतिभा गुप्ता

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