महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या/गोरखपुर। भूगर्भ जल (प्रबन्धन और विनियम) अधिनियम, 2019 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर बुधवार को विकास भवन में जिला भूगर्भ जल प्रबंधन परिषद की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। जिलाधिकारी की अनुमति से संपन्न हुई इस बैठक में जनपद में भूगर्भ जल के सुरक्षित दोहन, कूपों के पंजीकरण और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के आवेदनों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
नियमों के उल्लंघन पर रहेगी नजर
बैठक के दौरान मुख्य रूप से कृषि, घरेलू, वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोक्ताओं द्वारा वेब पोर्टल के माध्यम से किए गए आवेदनों की समीक्षा की गई। ऑनलाइन प्राप्त कूप पंजीकरण हेतु एक, कूप अनापत्ति हेतु दो, कूप अनापत्ति के नवीनीकरण हेतु तीन एवं वेधन अभिकरण के पंजीकरण हेतु दो आवेदनों पर विचार किया गया। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सामूहिक भूगर्भ जल उपयोक्ताओं के रजिस्ट्रीकरण और शिकायत निवारण की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए। प्रो. गोविन्द पाण्डेय ने साझा किए तकनीकी सुझाव बैठक में मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT) के जनपदीय अभियन्त्रण विभाग के आचार्य प्रो. गोविन्द पाण्डेय ने तकनीकी पक्ष रखते हुए भूगर्भ जल संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने जल संचयन की आधुनिक तकनीकों और अधिनियम के प्रावधानों के सही अनुपालन को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव साझा किए। उनके साथ ही गोरखपुर एनवायरनमेण्टल ऐक्शन ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. शिराज अख्तर वजीह ने भी पर्यावरण संरक्षण से जुड़े पहलुओं को रेखांकित किया।
विभाग के आला अधिकारी रहे मौजूद। बैठक में हाइड्रोलॉजिस्ट एवं नोडल अधिकारी डॉ. रागिनी सरस्वती सहित वन, सिंचाई, लघु सिंचाई, उत्तर प्रदेश जल निगम, गोरखपुर विकास प्राधिकरण, कृषि एवं उद्यान विभाग सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का समन्वय भूगर्भ जल विभाग, खण्ड-गोरखपुर द्वारा किया गया।