अनुराग लक्ष्य, 1 जनवरी
मुंबई संवाददाता।
जो गुज़र गया, वोह गुज़र गया, अब तो सिर्फ उसकी यादें ही रह जायेंगीं । जो आने वाला है उसका इस्तकबाल भी ज़रूरी है। क्योंकि अब वही हमारे सात रहने वाला है । 2024 की दस्तक हो चुकी है, खुदा करे यह साल समस्त देश वासियों के लिए मुफीद और फायदेमंद साबित हो, देश में एकता और भाईचारगी का संचार हो, साथ ही दिलों में एक दूसरे लिए प्यार हो सम्मान हो। इस नए साल के आगमन पर कुछ कतात और मुक्तक के साथ आपके दिलों में उतरने की नाकाम कोशिश कर रहा हूं, समाद फरमाएं,,,,
1/ आया है नया साल उमंगें लिए हुए
खुशियों की मीठी मीठी तरंगें लिए हुए
चाहत की डोर थामे चलो आसमां में हम
उड़ जाएं उल्फतों की पतंगें लिए हुए,,,
2/ खुदा करे कि नया साल तुझे रास आए
गम का साया कोई हरगिज़ न तेरे पास आए
गुलों के साथ रहो, खुशबुओं से महको तुम
जो भी आए तुम्हारी ज़िंदगी में खास आए,,,,
3/ मुद्दत हुई किसी ने मेरा हाल न पूछा
गुज़रा है किस तरह यह मेरा साल न पूछा
इस दौर ए परीशॉ में भी जो हैं मेरे अपने
चलती है कैसे तेरी रोटी दाल न पूछा,,,
4/ किसी के ख़्वाब टूटे और कोई हो गया बेघर
गुज़रते साल ने क्या खूब यह मंज़र दिखाया है
कहीं आह ओ फुगां , चीखें, कहीं मातम के अंगारे
जिधर देखो उधर कंबख्त ने सबको रुलाया है,,,,,
,,,,,,,,, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,,,,