लोग कहते रहें भूल जाऊँ तुम्हें। -ज्योतिमा शुक्ला रश्मि

तुम नहीं अपना मुझको समझते भले।
मेरे ख़्वाबों ख़यालों में तुम हो बसे।

चंद घड़ियां गुजारूं तेरे साथ में।
तेरे हाथों को लेकर मेरे हाथ में।
सांवली व सलोनी सी सुंदर छवी।
मेरे मन में सदा से रही है बसी।

तुमने समझा नहीं तुम मुक़रते रहे।
तुम नहीं,,,,

लोग कहते रहें भूल जाऊँ तुम्हें।
पर ये मुमकिन नहीं मैं भुलाऊँ तुम्हें।
रूठ गर जाओ मुझसे मनाऊं तुम्हें।
गीत अपने मैं गाकर सुनाऊं तुम्हें।

है चाहत लगा लूँ तुम्हें मैं गले।
तुम नहीं ,,,,,,

ज़िन्दगी की हो ऐसी कहानी मेरी।
राजा तुम हो जहाँ, मैं हूँ रानी तेरी।
स्वप्न पलकों पे ऐसे हैं सोते मेरे।
हर सुबह अश्रु नयनो को धोते मेरे।
भाव के अनगिनत पुष्प सूखे पड़े।

तुम नहीं,,,,,,

ज्योतिमा शुक्ला रश्मि

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *