कार्य कराने के बाद वेण्डर को भुगतान नही दे रहा बैंक मैनेजर, उच्चाधिकारियों से शिकायत

पीएमओ तक पहुंचा बैंक मैनेजर द्वारा वेण्डर को भुगतान न देने का मामला

भुखमरी के कगार पर वेण्डर का परिवार, वेण्डर को प्रताड़ित कर रहा बैंक मैनेजर

बस्ती 08 दिसम्बर। मुण्डेरवां थाना क्षेत्र के छपिया निवासी जफर अहमद ने भारतीय स्टेट बैंक के एजीएम, डीजीएम, चेयरमैन सहित भारत के प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति को शिकायती पत्र भेजकर बैंक की कोर्ट एरिया शाखा में कार्य कराये जाने के बाद 3,20,868 रूपये भुगतान न करने और तरह तरह से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। ये भुगतान साल 2013 से लम्बित है।

तब से आज तक जितने भी शाखा प्रबंधक आये किसी ने इस दिशा में शिकायतकर्ता को भुगतान नही दिया, बल्कि तरह तरह से परेशान करते रहे और धमकियां भी देते रहे। आपको बता दें ज़फर अहमद बी.एसण् इण्टरप्राइजेज के प्रोप्राइटर हैं और भारतीय स्टेट बैंक के वेण्डर हैं तो बैंक की शाखाओं तथा एटीएम में लगे ए.सी. के रखरखाव और मरम्मत का कार्य करते थे। कोर्ट एरिया शाखा को छोड़कर जनपद की किसी अन्य शाखा में इनका कोई भुगतान लम्बित नही है। बार बार आग्रह करने के बाद भुगतान न मिलने पर ज़फर अहमद ने बैंक के शाखा प्रबंधक सहित अन्य उच्चाधिकारियों को 17 अक्टूबर 2015 को लीगल नोटिस भेजा।

पुनः 24 मई 2016 को दूसरी नोटिस भेजा। इस पर डीजीएम ने एजीएम तथा एजीएम ने सभी शाखाओं के प्रबंधकों को लम्बित भुगतान करने का निर्देश जारी किया। अन्य शाखाओं ने भुगतान कर दिया लेकिन कोर्ट एरिया शाखा में आज तक 3,20,868 रूपये का भुगतान लम्बित है। इस बावत ज़फर अहमद ने वर्तमान शाखा प्रबंधक मनीष श्रीवास्तव से भुगतान के लिये आग्रह किया, उन्होने कहा भुगतान नही करूंगा जाओ जिससे भी शिकायत करनी है कर लो। वे उच्चाधिकारियों को भी अपशब्द कहने लगे।

ज़फर अमहद का कहना है कि भुगतान लम्बित होने के कारण परिवार भुखमरी के कगार पर आ गया है। 2020 में मार्ग दुर्घटना में घायल होने के कारण कोई खास मेहनत करने लायक भी नही रहे। ऐसी स्थिति में भुगतान न मिलने पर उनके सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। जफर अहमद ने समस्या की ओर जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराते हुये भुगतान दिलाने की मांग किया है। वहीं भारतीय स्टेट बैंक के एजीएम आलोक रंजन से इस बावत बात की गई तो उन्होने कहा मामला बहुत पुराना है, हमारे बैंक में इनका कोई रिकार्ड नही है, उच्चाधिकारियों को शिकायती पत्र भेजकर भुगतान हेतु अनावश्यक दबाव बना

रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *