अयोध्या। कारसेवकपुरम में आयोजित तीन दिवसीय परमेश्वरी गुरु शक्ति गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान आयोजन से जुड़े प्रमुख सहयोगी फौजदार सिंह ने कहा कि यह किसी भी प्रकार का राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गुरु-शिष्य परंपरा का महापर्व है। उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा पर देशभर के साथ-साथ नेपाल, भूटान और अन्य स्थानों से भी हजारों श्रद्धालु अपने गुरु के दर्शन और आशीर्वाद के लिए अयोध्या पहुंचते हैं।
फौजदार सिंह ने कहा कि परम पूज्य गुरुजी की आध्यात्मिक परंपरा और दिवंगत डॉ. नारायणदत्त शर्मा की साधना के कारण देशभर के शिष्य एक सूत्र में जुड़े हैं। उनका दावा है कि इस प्रकार का आयोजन, जिसमें डिब्रूगढ़ से लेकर कर्नाटक तक और नेपाल-भूटान सहित विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु एकत्र हों, अपने आप में अद्वितीय है।
उन्होंने बताया कि वे स्वयं वर्षों से गुरुजी की सेवा में जुड़े हैं और अब तक दस बड़े शिविरों के आयोजन में सहयोग कर चुके हैं। गुवाहाटी सहित कई स्थानों पर शिविर आयोजित किए गए हैं, जबकि अयोध्या में यह चौथा आयोजन है। उन्होंने कहा कि कारसेवकपुरम के शुरुआती दिनों से ही वे सेवा कार्यों में सक्रिय रहे हैं और गुरुजी के लिए हर प्रकार का सहयोग करना अपना सौभाग्य मानते हैं।
फौजदार सिंह ने बताया कि इस आयोजन में देशभर से श्रद्धालुओं और गुरु भाइयों का आर्थिक एवं सेवा सहयोग मिलता है। सीतामढ़ी, झारखंड, पंजाब, लखनऊ, हिमाचल प्रदेश, मुंबई, राजस्थान, महाराष्ट्र, इटारसी, अयोध्या तथा नेपाल सहित अनेक स्थानों से सहयोग प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक सहयोग का पूरा लेखा-जोखा तैयार किया जाता है और किसने कितना सहयोग दिया तथा धनराशि कहां खर्च हुई, इसका संपूर्ण विवरण पारदर्शी तरीके से रखा जाता है।
उन्होंने कहा कि गुरु पूर्णिमा का यह आयोजन केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और पारदर्शिता का उदाहरण है। श्रद्धालु गुरुजी से आशीर्वाद प्राप्त करने आते हैं और आयोजन समिति उनके स्वागत एवं व्यवस्था को अपनी जिम्मेदारी मानकर पूरी निष्ठा से निभाती है।