*ज्ञान कुंभ में स्नान*आचार्य सुरेश जोशी

🌻 ओ३म् 🌻
*ज्ञान कुंभ में स्नान*
जनपद बाराबंकी के दशहराबाग क्षेत्र में स्थित *आर्यावर्त साधना सदन आश्रम* पर चल रहे एक माह तक चल रहे *ज्ञान कुंभ में श्रोताओं ने प्रसन्न मन से स्नान* किया।इस अवसर पर सर्वप्रथम नर-नारियों ने वैदिक यज्ञ में आहुतियां डाली।पुन: वैदिक भजनों का अमृतपान किया! पुरोहित डांक्टर राम नारायण जी के मधुर भजनोपदेश सुनकर श्रोतख भावविभोर हो गये।
🏵️*कौन है गुरू?*🏵️
गुरु के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आचार्य श्री ने बताया।जीवन में अज्ञान,अन्याय व अभाव से मुक्त होने के लिए मानव मात्र को गुरु की परं आवश्यकता होती है।इसके लिए *गुरुओं के भी गुरु परं गुरु परमात्मा* ने हमें तीन गुरु सृष्टि के आदि में ही दिये है।उनके नाम हैं *माता-पिता-आचार्य* इसके अतिरिक्त जो गुरुओं का भी गुरु है वो परं पिता परमात्मा है। क्योंकि परमात्मा ने ही *माता-पिता व आचार्य रुपी गुरु* हमें प्रदान किये हैं।इसके अतिरिक्त चारों वेदों में *गायत्री ही एक मात्र गुरु* है।आचार्य श्री ने बताया कि मनुस्मृति,महाभारत व रामायण जैंसे इतिहास व काब्य ग्रंथों में महर्षि मनु,महर्षि व्यास व महर्षि बाल्मीकि जैंसे ऋषियों ने लिखा है कि * *स्त्रियों कै अलग से कोई व्रत उपवास नहीं करना चाहिए क्योंकि उनके लिए पति सेवा ही सर्वश्रेष्ठ कर्म है और पति ही उनका एक मात्र गुरु पति ही है* किसी भी स्त्री को पर पुरुष को गुरु नहीं बनाना चाहिए यही वैदिक संस्कृति है।
प्रथम दिवस पर उपस्थित प्रतिष्ठित महानुभावों में श्री शांति स्वरुप जी। श्री अवधेश शुक्ल जी।श्री राजीव अवस्थी जी।श्री रमापति वर्मा जी।श्री अर्जुनदेव जी।श्री रमेश त्रिपाठी।श्री कृष्ण चंद्र जी।श्री रामसुजान जी।श्री हरेंद्र सिंह जी।आदि थे।
इसी प्रकार मातृशक्तियों मे माता सरोज जी।लक्ष्मी शुक्ला जी।रंजना अवस्थी जी।इंदु शुक्ला जी।श्रीमती सुमन जी सुमन फाउंडेशन जी।कविता दूबे जी आदि ।सविता शिक्षिका जी।कुंती जी ।शिक्षिका शिखा आदि उपस्थित रही।
प्रथम दिवस का *ज्ञान कुंभ स्नान* सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ।
*व्यवस्थापिका*
पंडिता रुक्मिणी जोशी।