एचपीवी टीकाकरण में उत्कृष्ट कार्य के लिए बहराइच को मिला राज्य स्तरीय सम्मान

एचपीवी टीकाकरण में उत्कृष्ट कार्य के लिए बहराइच को मिला राज्य स्तरीय सम्मान

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सीडीओ सुनील कुमार धनवंता को प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित

स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक व एमडी मेडिकल एजुकेशन नेहा शर्मा भी रहीं मौजूद

बहराइच 16 जुलाई। किशोरी बालिकाओं को भविष्य में सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से सुरक्षित करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एचपीवी टीकाकरण अभियान में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए बहराइच को राज्य स्तर पर सम्मान मिला है। जिले में अभियान के प्रभावी संचालन, बेहतर समन्वय और उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए मुख्य विकास अधिकारी आईएएस सुनील धनवंता को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल महोदया ने एस.जी.पी.जी.आई. परिसर स्थित श्रुति प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रबंध निदेशक आईएएस नेहा शर्मा भी मौजूद रहीं।

मुख्य विकास अधिकारी ने बताया यह सम्मान स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायती राज विभाग तथा जिला प्रशासन के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। जिले में विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों और समुदाय स्तर पर व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। अभिभावकों की शंकाओं का समाधान किया गया और किशोरी बालिकाओं तक टीकाकरण की सुविधा पहुंचाने के लिए विशेष सत्र आयोजित किए गए।

सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम का प्रभावी माध्यम है एचपीवी टीकारू-

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि महिलाओं में होने वाले प्रमुख कैंसरों में सर्वाइकल कैंसर एक प्रमुख कारण है और इसके लगभग 99 प्रतिशत मामलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) संक्रमण की भूमिका पाई जाती है। उन्होंने कहा कि यह वायरस सामान्य संपर्क, हाथ मिलाने, साथ बैठने या भोजन साझा करने से नहीं फैलता, बल्कि यौन संपर्क के दौरान त्वचा और श्लेष्मा झिल्ली के निकट संपर्क से फैलता है।

उन्होंने बताया कि एचपीवी संक्रमण के शुरुआती चरण में सामान्यतः कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। अधिकांश मामलों में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस को समाप्त कर देती है, लेकिन कुछ महिलाओं में संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है। ऐसे मामलों में 10 से 15 वर्षों के दौरान गर्भाशय ग्रीवा की कोशिकाओं में धीरे-धीरे बदलाव होते हैं, जो आगे चलकर सर्वाइकल कैंसर का रूप ले सकते हैं।

सीएमओ ने कहा कि 9 से 14 वर्ष की आयु में एचपीवी वैक्सीन सबसे अधिक प्रभावी होती है। इस आयु में टीकाकरण कराने पर शरीर में वायरस के विरुद्ध मजबूत प्रतिरक्षा विकसित होती है, जिससे भविष्य में सर्वाइकल कैंसर का खतरा काफी कम हो जाता है। उन्होंने कहा कि यह टीका पूरी तरह सुरक्षित और प्रभावी है तथा इसे लेकर फैलने वाली अफवाहों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

बहराइच की उल्लेखनीय उपलब्धिरू-

डीएचईआईओ बृजेश सिंह ने बताया कि 13 जुलाई 2026 तक जिले में 2,508 विशेष टीकाकरण सत्रों का आयोजन किया गया। 41,723 पात्र किशोरियों के लक्ष्य के सापेक्ष 7,814 किशोरियों का एचपीवी टीकाकरण किया गया, जो 18.73 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति है। अभियान के दौरान स्वास्थ्य विभाग की टीमों, आशा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और विद्यालयों के सहयोग से बड़ी संख्या में किशोरियों को टीकाकरण से जोड़ा गया।

मुख्य विकास अधिकारी सुनील धनवंता ने सभी अभिभावकों से अपील की है कि वे निर्धारित आयु वर्ग की प्रत्येक किशोरी का समय पर एचपीवी टीकाकरण कराकर उसे भविष्य में होने वाले सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित बनाने में सहयोग करें।

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