महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या । धर्मनगरी अयोध्या में समाज सेवा और जनहित के कार्यों में सदैव अग्रणी रहने वाले प्रखर समाजसेवी सुशील कुमार चतुर्वेदी ने प्रभु श्रीरामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। रामलला के दर्शन के उपरांत उन्होंने हनुमानगढ़ी पहुँचकर बजरंगबली के चरणों में शीश नवाया और देश-प्रदेश की सुख-शांति, समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की।
‘मानव सेवा ही सच्ची ईश्वर भक्ति’
पत्रकारों से बातचीत करते हुए सुशील कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि अयोध्या की यह यात्रा उनके लिए महज धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा के संचय और सेवा के संकल्प को सुदृढ़ करने का माध्यम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका जीवन समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के उत्थान के लिए समर्पित है। उन्होंने कहा, “संत सेवा, गौ सेवा, बंदरों की सेवा और निर्धन वर्ग की सहायता ही मेरा सर्वोच्च धर्म है। सच्ची ईश्वर भक्ति केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि जीव सेवा में भी निहित है। Big Wash Laundry के जरिए बढ़ा रहे सेवा के हाथ सुशील चतुर्वेदी ‘Big Wash Laundry’ के संस्थापक भी हैं। उन्होंने बताया कि यह संस्थान केवल व्यावसायिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व के निर्वहन के लिए कार्य कर रहा है। इस मंच के माध्यम से वे साधु-संतों, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और समाज के वंचित वर्गों को निरंतर निःस्वार्थ सहयोग प्रदान करते हैं। उनका मानना है कि सेवा और सम्मान की भावना से किया गया कार्य ही समाज के कमजोर वर्गों को संबल प्रदान कर सकता है।
युवाओं से समाज निर्माण का आह्वान समाजसेवी चतुर्वेदी ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपने व्यस्त जीवन से कुछ समय निकालकर पर्यावरण संरक्षण, गौ सेवा और समाज सेवा जैसे रचनात्मक कार्यों में भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यदि हर व्यक्ति अपनी क्षमतानुसार समाज में योगदान दे, तो एक सशक्त और संवेदनशील भारत का निर्माण निश्चित है। इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति अयोध्या प्रवास के दौरान चतुर्वेदी के साथ तक्षशिला के डायरेक्टर संतोष मिश्रा, संतोष तिवारी, राष्ट्रीय कवि दुर्गेश दुर्लभ, कुलदीप, राहुल यादव, प्रिंस, अर्जुन और विनय सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। उपस्थित जनों ने सुशील चतुर्वेदी द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। स्थानीय लोगों का कहना था कि ऐसे प्रयास न केवल जरूरतमंदों की मदद करते हैं, बल्कि समाज में मानवता और आपसी सहयोग की भावना को भी मजबूत बनाते हैं।