संयुक्त वाम दल ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

संयुक्त वाम दल ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन

लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा ,बुलडोजर कार्रवाई रोकने की मांग

संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए जारी रहेगा संघर्ष -का. अशर्फीलाल

बस्ती। सोमवार को संयुक्त वाम दल के बैनर तले भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ‘सीपीआई’ तथा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी ‘मार्क्सवादी-लेनिनवादी, के कार्यकर्ताओं ने सोमवार को एक दिवसीय प्रतिवाद कार्यक्रम के तहत राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन कामरेड अशर्फीलाल के नेतृत्व में जिलाधिकारी के माध्यम से प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा।

ज्ञापन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश सहित देश में लोकतांत्रिक अधिकारों पर लगातार हमले हो रहे हैं। बुलडोजर कार्रवाई, फर्जी मुकदमे, नेताओं और कार्यकर्ताओं को नजरबंद करना तथा शांतिपूर्ण आंदोलनों पर रोक जैसी घटनाएं संविधान की भावना के विपरीत हैं। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि असहमति की आवाज उठाने वालों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुद्धिजीवियों और मजदूर नेताओं पर दमनात्मक कार्रवाई की जा रही है।

संयुक्त वाम दल ने राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर सरकार को आवश्यक निर्देश देने की मांग करते हुए कई प्रमुख मुद्दे उठाए। इनमें मेरठ की दलित छात्रा ललिता गौतम हत्याकांड में कार्रवाई, नीट पेपर लीक मामले में जवाबदेही तय करने, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) को भंग करने, अयोध्या चढ़ावा एवं दान संबंधी मामले की निष्पक्ष जांच कराने, बुलडोजर कार्रवाई पर रोक लगाने, मजदूर नेताओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की रिहाई, जन आंदोलनों से पहले नेताओं की नजरबंदी पर रोक, आदिवासी समुदायों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने, पेयजल संकट दूर करने, दलित उत्पीड़न की घटनाओं में डीएम और एसपी की जवाबदेही तय करने तथा महिलाओं के विरुद्ध बढ़ रहे अपराधों पर प्रभावी कार्रवाई की मांग शामिल है।

कामरेड अशर्फीलाल ने कहा कि लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार जनहित से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से कार्रवाई नहीं करती है तो वाम दल जन आंदोलनों को और तेज करेंगे।

भाकपा माले संयोजक का. रामलौट ने कहा कि प्रदेश में महिलाओं, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं बढ़ रही हैं तथा अपराधियों को संरक्षण मिलने का आरोप भी लगाया गया। उन्होने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करते हुए शांतिपूर्ण प्रदर्शन और जन आंदोलनों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग किया।

ज्ञापन सौंपने वालों में मुख्य रूप से अर्जक संघ जिलाध्यक्ष गौरीशंकर, रामशंकर निराला, राजकुमार प्रजापति, पंचम लाल, रेनू, शान्ती देवी, राजेश आदि शामिल रहे।