
अनुराग लक्ष्य 8 जुलाई
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
कहते हैं कुदरत जब अपने बंदों से खुश होती है तो अपने अनमोल ख़ज़ानों का पता देती है। लेकिन जब नाराज़ होती है तो ऐसे असबाब पैदा कर देती है कि इंसान उस कुदरती क़हर के सामने बौना हो जाता है।
पिछले एक सप्ताह की बारिश ने मुंबई में वोह क़हर बरपा किया है कि लोग इस बारिश के तुफान और सैलाब को कभी भूलना भी चाहें तो कभी भूल नहीं सकते।
सबसे ज्यादा दयनीय स्थिति नालासुपाड़ा की है। तस्वीरें बता रही हैं कि लोग तैर कर अपने रास्ते तय करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंच रहे हैं।
भिवंडी में नाले और गटर तक इस बारिश में बह गए, लोग घरों को छोड़ कर अपने आशियाने को छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। ऐसे आलम में रोज़गार नहीं हो रहे हैं। दुकानें बंद हो गई हैं। बेहाल हैं इस बारिश के कहर से। कल शाम की बारिश ने जो बची खुची कसर थी वह भी पूरी कर दी।
अब देखना यह है कि जीने के बहाने तलाशती यह ज़िंदगी कब मुस्कुराती है।
और कब इस कुदरती क़हर ढाती बारिश से निजात पाती है।