दिग्गज अभिनेता राज कुमार के 31 वीं पुण्यतिथि पर विशेष ) राज कुमार जैसा न कोई था और न कोई बन पाएगा, सलीम बस्तवी अज़ीज़ी,,,,,,

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अनुराग लक्ष्य, 03 जुलाई
सलीम बस्तवी अज़ीज़ी
मुम्बई संवाददाता ।
आज 3 जुलाई है, आज ही के दिन हमने एक ऐसे अभिनेता को खो दिया था, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। अपनी बुलन्द आवाज़ और शानदार डायलॉग के लिए मशहूर राजकुमार हमेशा सुर्खियों में रहे। यहाँ तक कि जब उनकी मौत हुई तब भी अपने ही अंदाज़ में मौत को गले लगाना मुनासिब समझा। फिल्म इंडस्ट्री को भनक तक नहीं लगने दी।
और 3 जुलाई 1996 को यह स्वाभिमानी अभिनेता आसमान के सितारों में खो गया ।
राजकुमार का पूरा नाम कुलभूषण पंडित था। फिल्मों के आने के पहले मुंबई के माहिम थाने में सब इंस्पेक्टर हुआ करते थे, जहां आज भी उनके बहुत से किस्से मौजूद हैं।
राजकुमार ने अपने फिल्मी कैरियर की शुरूआत 1952 में फिल्म रंगीली थी, उसके बाद नरगिस के साथ मदर इण्डिया फिल्म में राजकुमार के अभिनय का जादू ऐसा चला कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री हैरान रह गई।
अपनी रोबीली आवाज़ और बेबाक संवाद अदायगी के ज़रिए बहुत जल्द ही राजकुमार हिंदू फिल्मों के बड़े अभिनेताओं के समकक्ष एक चुनौती बन गए। यहां तक कि उस ज़माने के सुपर स्टार दिलीप कुमार के राजकुमार जब फिल्म पैग़ाम में आए तो एक हंगामा सा हो गया, राजकुमार पूरी फिल्म में दिलीपकुमार पर भारी पड़ गए।
उसके बाद राजकुमार का दौर जो शुरू हुआ तो का ही थमा ही नहीं।
फिल्म दिल एक मंदिर, पाकीज़ा, ज़िंदगी, हमराज़, वक्त,मर्यादा, काजल, एक से बढ़कर एक, 36 घंटे, चंबल की कसम, कुदरत, बुलंदी, तिरंगा, जांबाज, मरते दम तक, पुलिस पब्लिक, सौदागर जैसी दर्जनों फिल्मों के जादू ने राजकुमार को एक श्रेष्ठ अभिनेता की उपाधि के साथ डायलॉग के बादशाह की उपाधि से नवाज़ा।
राजकुमार मरते दम तक फिल्मी पार्टियों से हमेशा दूर रहे और अवॉर्ड की कभी कोई ख्वाहिश नहीं जताई, फिर उन्हें कई सफल फिल्मों के लिए बेस्ट एक्टर का अवार्ड भी मिला। यह भारतीय सिनेमा का सौभाग्य ही कहा जा सकता है कि हमें राज कुमार जैसा एक ऐसा अभिनेता मिला जिसे हर वर्ग के लोग हमेशा बहुत प्यार देते थे। अफसोस आज वोह हमारे बीच नहीं हैं।