अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर सर्बिया में गूंजा योग का संदेश, मोहनजी ने कहा- योग आत्म-संबंध और आत्म-अन्वेषण का मार्ग

 

बेलग्रेड में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस समारोह में 200 से अधिक लोगों की भागीदारी, मोहनजी ने योग के आध्यात्मिक आयामों पर डाला प्रकाश…..

अयोध्या l 21 जून।
सर्बिया की राजधानी बेलग्रेड में 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया। ऐतिहासिक कालेमेगदान किले स्थित विक्टर स्मारक पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु ब्रह्मर्षि डॉ. मोहनजी ने विशेष रूप से भाग लिया। कार्यक्रम का आयोजन भारत के दूतावास, बेलग्रेड द्वारा किया गया, जिसमें 200 से अधिक योग साधकों, वेलनेस प्रेमियों और भारत के मित्रों ने हिस्सा लिया।

सावा और डेन्यूब नदियों के संगम स्थल को निहारते इस ऐतिहासिक स्थल पर आयोजित कार्यक्रम ने प्रतिभागियों को योग को केवल शारीरिक स्वास्थ्य का माध्यम नहीं, बल्कि आत्म-जागरूकता, आंतरिक स्थिरता और आत्म-संबंध की यात्रा के रूप में समझने का अवसर प्रदान किया।

अपने संबोधन में मोहनजी ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन और चेतना की गहराइयों को समझने का विज्ञान है। उन्होंने कहा, “योग में अत्यंत गहराई है। यह सतही नहीं है। योग आत्म-अन्वेषण और स्वयं से जुड़ने की प्रक्रिया है।”
मोहनजी ने पतंजलि योग सूत्रों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह मानव जीवन और आध्यात्मिक विकास की सम्पूर्ण यात्रा का मार्गदर्शक ग्रंथ है। उन्होंने कहा कि प्राचीन ऋषियों ने शरीर, श्वास, ऊर्जा और चेतना के संबंधों का गहन अध्ययन कर योग की परंपरा विकसित की थी।
उन्होंने कहा, “योग स्वाभाविक है, योग प्राकृतिक है। जब आप पूरी तरह स्वाभाविक हो जाते हैं, तभी आप सच्चे अर्थों में योगी बनते हैं।”
मोहनजी ने आत्म-संबंध को भारत की विश्व को दी गई सबसे मूल्यवान देन बताते हुए कहा कि स्वयं से जुड़ाव ही सबसे अनमोल संबंध है। उन्होंने विभिन्न योग परंपराओं से जुड़े साधकों को संबोधित करते हुए कहा कि भले ही मार्ग अलग-अलग हों, लेकिन सभी का लक्ष्य एक ही है। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री की भी सराहना की और कहा कि उनके प्रयासों से वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस को मान्यता मिली, जिससे योग को वैश्विक पहचान प्राप्त हुई। समारोह में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कॉमन योग प्रोटोकॉल के साथ विभिन्न योग संस्थाओं और आध्यात्मिक संगठनों द्वारा विशेष सत्र आयोजित किए गए। मोहनजी द्वारा स्थापित हिमालयन स्कूल ऑफ ट्रेडिशनल योग का प्रतिनिधित्व करते हुए स्टाशा मिशिच ने प्रतिभागियों को मोहनजी की प्रसिद्ध “डोरवे टू हेवन” ध्यान साधना कराई। कार्यक्रम के अंत में मोहनजी फाउंडेशन ने सर्बिया में भारत के राजदूत , भारतीय दूतावास की टीम, आयोजकों और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। गौरतलब है कि मोहनजी फाउंडेशन पिछले कई वर्षों से भारतीय दूतावास के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करता रहा है और दुनिया भर में भारतीय संस्कृति, योग और आध्यात्मिक मूल्यों के प्रसार में योगदान दे रहा है।