लखनऊ । ब्रह्मर्षि डॉ. मोहनजी द्वारा स्थापित अम्मुकेयर चैरिटेबल ट्रस्ट 1 जून 2026 को महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबकेश्वर में अपने छठे मोहनजी अन्नक्षेत्र का उद्घाटन करने जा रहा है। यह नया अन्नक्षेत्र तीर्थयात्रियों, साधु-संतों, आर्थिक रूप से कमज़ोर लोगों तथा स्थानीय समुदायों को नियमित रूप से निःशुल्क पौष्टिक भोजन और मानवीय सहायता प्रदान करेगा।
ट्रस्ट के अनुसार यह पहल सेवा, करुणा, सम्मान और निःस्वार्थ भाव से समाज कल्याण के अपने मिशन को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पिछले 23 वर्षों में अम्मुकेयर ने अपने ‘एक्ट फॉर हंगर’ अभियान के माध्यम से 25 लाख से अधिक भूखे लोगों तक भोजन और आवश्यक सामग्री पहुंचाई है।
वर्तमान में संगठन चित्रकूट, वाराणसी, हरिद्वार, बीड़ और उज्जैन सहित पांच स्थानों पर स्थायी अन्नक्षेत्र संचालित कर रहा है, जहां प्रतिमाह 15 हजार से अधिक जरूरतमंदों, तीर्थयात्रियों और साधु-संतों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है।
अम्मुकेयर का ‘एक्ट फॉर हंगर’ कार्यक्रम देश के 18 से अधिक स्थानों पर सक्रिय है। वर्ष 2025 में इस अभियान के तहत 7.30 लाख से अधिक लोगों तक भोजन और सहायता पहुंचाई गई। केवल अप्रैल 2026 में ही 37 हजार से अधिक भोजन वितरित किए गए। संगठन की गतिविधियाँ चित्रकूट, वाराणसी, हरिद्वार, उज्जैन, बीड़, शिरडी, पुरी, तिरुवन्नामलाई, बेंगलुरु, गोकर्ण, गणेशपुरी और अन्य क्षेत्रों तक फैली हुई हैं।
महाकुंभ और केरल कुंभ-महामाघम महोत्सव में भी विशाल अन्नसेवा
अम्मुकेयर की सेवा गतिविधियाँ देश के बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में भी लगातार जारी हैं। वर्ष 2025 के महाकुंभ के दौरान मोहनजी विलेज के माध्यम से श्रद्धालुओं और तीर्थयात्रियों को 56,500 से अधिक शुद्ध शाकाहारी (वीगन) भोजन परोसे गए।
वहीं जनवरी-फरवरी 2026 में आयोजित केरल कुंभ – महामाघम महोत्सव में अन्नप्रसाद सेवा की शुरुआत लगभग 3,000 श्रद्धालुओं को भोजन कराने से हुई, जो महोत्सव के समापन तक बढ़कर 3.5 लाख से अधिक श्रद्धालुओं तक पहुंच गई। यह सेवा अभियान संगठन की व्यापक जनकल्याण और अन्नदान परंपरा का महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
23 राज्यों में सक्रिय है अम्मुकेयर
वर्ष 2003 में स्थापित अम्मुकेयर आज देश के 23 राज्यों में सक्रिय है। संगठन के 200 से अधिक स्वयंसेवक विभिन्न सेवा परियोजनाओं का संचालन कर रहे हैं। संस्था का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं बल्कि लोगों को आत्मनिर्भर बनाना और सम्मानजनक जीवन जीने के लिए सशक्त करना है।
बच्चों की शिक्षा और पोषण पर विशेष फोकस
अम्मुकेयर देशभर में 12 ‘मोहनजी का आंगन’ केंद्र संचालित कर रहा है, जहाँ 700 से अधिक वंचित बच्चों को शिक्षा, भावनात्मक विकास और मूल्य आधारित प्रशिक्षण दिया जाता है। इन केंद्रों में संचालित छह सामुदायिक रसोइयों के माध्यम से बच्चों को प्रतिदिन पौष्टिक भोजन भी उपलब्ध कराया जाता है।
संस्था आर्थिक रूप से कमज़ोर विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति और शैक्षिक सहायता भी प्रदान करती है। वर्ष 2025 में 44 विद्यार्थियों को लगभग 17 लाख रुपये की छात्रवृत्ति देकर उनकी शिक्षा जारी रखने में सहयोग किया गया।
वृद्धों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए भी कार्य
अम्मुकेयर तिरुवन्नामलाई में वरिष्ठ नागरिकों के लिए मोहनजी होम फॉर सीनियर्स संचालित करता है, जहां उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाता है। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को आपातकालीन स्वास्थ्य सहायता भी प्रदान की जाती है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में संस्था ने झारखंड के मोहनपुर और दिल्ली में प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को कढ़ाई, सिलाई,y ब्यूटी केयर और अन्य रोजगारपरक कौशल सिखाए गए हैं, जिससे दर्जनों परिवारों की आजीविका मजबूत हुई है।
करुणा और सेवा का राष्ट्रीय अभियान
अम्मुकेयर का कहना है कि करुणा, सम्मान और सामुदायिक सहयोग के मूल्यों पर आधारित यह अभियान देश के वंचित और जरूरतमंद लोगों तक निरंतर सहायता पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। त्र्यंबकेश्वर में नए अन्नक्षेत्र की शुरुआत के साथ संगठन की सेवा गतिविधियों का दायरा और अधिक विस्तारित होगा तथा अधिक लोगों तक भोजन, सहायता और सम्मानजनक जीवन का संदेश पहुंच सकेगा।