दुष्टों के संहार एवं भक्तों के कल्याण के लिए भगवान लेते हैं अवतार: पंडित हरिओम
बस्ती। अवतार के तीन भेद किए गए हैं जन्म, समागम और प्राकट्य। शरीर का जन्म होता है, आत्मा और शरीर का समागम होता है, ईश्वर का केवल प्राकट्य होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने भक्तों का उद्धार व पृथ्वी को दैत्य शक्तियों से मुक्त कराने के लिए अवतार लिया था। जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है, तब-तब भगवान धरती पर अवतरित होते हैं। अवध धाम से पधारे कथा व्यास पंडित हरिओम शुक्ल ने उक्त बातें कही।
श्री शुक्ल नगर पंचायत के वार्ड नंबर 13 मंगल पाण्डेय नगर भदासी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन श्रोताओं को श्रीकृष्ण जन्म की कथा सुना रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। जब-जब धरती पर पाप, अनाचार बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। जब अत्याचारी कंस के पापों से धरती डोलने लगी, तो भगवान कृष्ण को अवतरित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि सात संतानों के बाद जब देवकी गर्भवती हुई, तो उसे अपनी इस संतान की मृत्यु का भय सता रहा था। भगवान की लीला वे स्वयं ही समझ सकते हैं। भगवान कृष्ण के जन्म लेते ही जेल के सभी बंधन टूट गए और भगवान श्रीकृष्ण गोकुल पहुंच गए। कथा के दौरान कलाकारों ने गीतों के माध्यम से श्रीकृष्ण जन्म का वर्णन किया। साथ ही निकाली गई झांकी ने दर्शकों का मन मोह लिया। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत बधाई गीतों पर श्रोता देर रात तक झूमते रहे। इस मौके पर मुख्य यजमान नित्यानंद पांडेय एवं शशिबाला पाण्डेय, पंडित चंद्र शेखर तिवारी, पूर्व प्रधान शिव नारायण पाण्डेय, सभासद प्रतिनिधि रमाकांत पांडेय, राम प्रताप पाण्डेय, सामवेद पांडेय, चंद्र शेखर ओझा, दयानिधि पाण्डेय, सुधाकर पाण्डेय, बेनीमाधव तिवारी, वेद प्रकाश ब्रह्मानंद पाण्डेय, दयानंद पाण्डेय, आशीष पाण्डेय, सचिन, बिपिन, बटुकनाथ पाण्डेय, बालेंद्र भूषण, श्रीकांत, वैभव, विपुल, महेंद्र, प्रफुल्ल राघवेंद्र पाण्डेय, देवी सेवक पाण्डेय, दिलीप, धर्मेंद्र कुमार मिश्र, धीरेंद्र मिश्र, रोहित, मोहित, पूजा, कृष्ण कुमारी, प्रीती, अन्नू सहित तमाम श्रोता मौजूद रहे।