कथक की लय पर खिली प्रतिभा — अविका वार्ष्णेय ने दुर्ग का नाम रोशन किया
दुर्ग। कला और संस्कृति की नगरी दुर्ग में स्थित कृष्णप्रिया कथक केंद्र द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम ‘आहार्यम्’ ने एक बार फिर शास्त्रीय नृत्य की गरिमा को जीवंत कर दिया। इस सांस्कृतिक संध्या में जहां कई प्रस्तुतियों ने दर्शकों को आकर्षित किया, वहीं अविका वार्ष्णेय की प्रस्तुति विशेष चर्चा का विषय बनी रही।
नन्हीं उम्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करने वाली अविका ने अपनी सधी हुई मुद्राओं, भावपूर्ण अभिव्यक्ति और ताल-लय की सटीकता से दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी प्रस्तुति में केवल कला नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत और समर्पण स्पष्ट झलक रहा था।
महज 14 वर्ष की आयु में अविका का कथक में डिप्लोमा प्राप्त करना उनकी निरंतर साधना और लगन का परिणाम है। इस उपलब्धि के पीछे उनकी माँ नेहा वार्ष्णेय का विशेष योगदान रहा है, जिन्होंने बेटी के सपनों को साकार करने के लिए हर कदम पर साथ दिया। अविका ने खुद भी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी माँ के सहयोग और अथक प्रयासों को दिया।
अविका की यह यात्रा तब शुरू हुई थी जब वह मात्र 4 वर्ष की थीं। बचपन से ही नृत्य के प्रति रुचि और नियमित अभ्यास ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उनके अनुसार, कथक ने उन्हें केवल नृत्य ही नहीं सिखाया, बल्कि अनुशासन, संस्कार और जीवन के प्रति प्रेम भी सिखाया है।
आज अविका उस मुकाम पर खड़ी हैं, जहां वह अपनी औपचारिक शिक्षा पूरी करने से पहले ही शास्त्रीय नृत्य में दक्षता हासिल कर चुकी हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे शहर के लिए गर्व का विषय है।
इस आयोजन ने यह साबित कर दिया कि समर्पण और सही मार्गदर्शन के साथ छोटी उम्र में भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं।