दीक्षान्त परेड में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशिक्षु आरक्षियों को दी संवेदनशील और अनुशासित पुलिसिंग की सीख


लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशिक्षु आरक्षियों का आह्वान करते हुए कहा कि आप सभी ने अपने प्रशिक्षण काल में कठोर परिश्रम, लगन और अनुशासन के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया है और आज की इस परेड में उसकी उत्कृष्ट एवं भव्य प्रस्तुति देखने को मिली है। उन्होंने कहा कि दीक्षान्त समारोह के उपरान्त आप सभी विभिन्न जनपदों में दायित्वों का निर्वहन करेंगे। पुलिस कार्मिक अपराधियों के लिए जितने कठोर हों, नागरिकों के प्रति उतने ही संवेदनशील भी होने चाहिए। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रशिक्षु प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान, कौशल और मूल्यों का उपयोग करते हुए पूरी निष्ठा, ईमानदारी और कर्तव्यपरायणता के साथ उत्तर प्रदेश पुलिस की गौरवशाली परम्परा को आगे बढ़ाएंगे।मुख्यमंत्री आज यहां आरक्षी नागरिक पुलिस भर्ती वर्ष 2025-26 बैच के दीक्षान्त परेड समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने परेड की सलामी ली तथा निरीक्षण किया और प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रशिक्षु आरक्षियों को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार देकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि आज का दीक्षान्त समारोह इस बात का प्रमाण है कि बेटियों ने बेहतरीन प्रशिक्षण प्राप्त कर पुलिस की व्यावसायिक क्षमता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस बल को देश और दुनिया की श्रेष्ठ पुलिस के रूप में स्थापित करने के प्रयासों में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस प्रशिक्षण के विषय में कहा जाता है कि प्रशिक्षण में जितना पसीना बहेगा, बाद में उतना ही कम रक्त बहाने की नौबत आएगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 पुलिस प्रशिक्षण संस्थानों, 73 जनपदों की पुलिस लाइनों और 29 प्रांतीय सशस्त्र बल वाहिनियों सहित कुल 112 प्रशिक्षण केन्द्रों में आरक्षी दीक्षान्त परेड एक साथ आयोजित की जा रही है।उन्होंने जानकारी दी कि 15 जून 2025 को लखनऊ के रक्षा प्रदर्शनी मैदान में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 60,244 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान किए थे। 21 जुलाई 2025 से प्रारम्भ हुए प्रशिक्षण के दौरान विभिन्न प्रशिक्षण केन्द्रों का निरीक्षण करने का अवसर प्राप्त हुआ और प्रदेश में पुलिस प्रशिक्षण सुविधाओं को पहले की तुलना में अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। उन्होंने कहा कि पुलिस की सबसे बड़ी ताकत अनुशासन और दल भावना होती है तथा देश के लिए सर्वोत्तम योगदान देने की भावना किसी भी वर्दीधारी बल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से अब तक प्रदेश में 2.18 लाख से अधिक पुलिस कार्मिकों की भर्ती की जा चुकी है तथा एक लाख से अधिक कर्मियों को विभिन्न चरणों में पदोन्नति दी गई है। वर्ष 2017 से पहले पुलिस प्रशिक्षण क्षमता लगभग 3,000 थी, जिसे बढ़ाकर 60,244 आरक्षियों का प्रशिक्षण एक साथ प्रदेश के प्रशिक्षण केन्द्रों में सम्पन्न किया गया है। उन्होंने बताया कि 55 जनपदों में पुलिस कर्मियों के लिए उच्च स्तरीय बैरक एवं आवासीय सुविधाएं विकसित की गई हैं तथा पुलिस प्रशिक्षण हेतु डिजिटल मंच भी प्रारम्भ किया गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जनपदों में साइबर अपराध थानों की स्थापना की गई है तथा आधुनिक अपराधों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में दंगे नहीं होते, माफिया राज समाप्त हुआ है और अवैध वसूली पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है। ‘शून्य सहनशीलता’ नीति के तहत अपराधियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जा रही है।इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि विगत नौ वर्षों में कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा, पारदर्शी भर्ती और प्रशिक्षण के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश पुलिस ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद पुलिस बल के आधुनिकीकरण और क्षमता वृद्धि पर विशेष बल दिया गया है, जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर भर्ती और पदोन्नति की गई है।कार्यक्रम में सांसद दिनेश शर्मा, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, अपर मुख्य सचिव गृह एवं सूचना संजय प्रसाद, पुलिस आयुक्त अमरेन्द्र कुमार सेंगर सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।