महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान श्री परशुराम जी की जयंती के पावन अवसर पर धर्मनगरी अयोध्या में विभिन्न सेवा ट्रस्टों और तीर्थ पुरोहित समाज द्वारा भव्य आयोजन किए गए। इस मौके पर अयोध्या के प्रमुख संतों और तीर्थ पुरोहितों ने समाज सेवा, सनातन धर्म की रक्षा और जन कल्याण का संकल्प लिया।
प्रमुख संतों और अध्यक्षों का संबोधन कार्यक्रम के दौरान तीर्थ पुरोहित समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों ने भगवान परशुराम के आदर्शों पर प्रकाश डाला। राजेश महाराज (राष्ट्रीय अध्यक्ष, अयोध्या तीर्थ पुरोहित धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट) उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम केवल ब्राह्मण समाज के नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के रक्षक थे। उन्होंने अन्याय के विरुद्ध शस्त्र और शास्त्र दोनों का समन्वय सिखाया।
दुर्गेश महाराज (अध्यक्ष, समाज सेवा ट्रस्ट) उन्होंने समाज सेवा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है और ट्रस्ट का मुख्य उद्देश्य असहायों की सहायता करना है। प्रदीप महाराज (अध्यक्ष, लड्डू गोपाल सेवा ट्रस्ट) उन्होंने भक्ति मार्ग और सेवा को जोड़ते हुए युवाओं को सनातन मूल्यों से जुड़ने का आह्वान किया।
राजा महाराज (अध्यक्ष, सरयू आरती) माँ सरयू के तट पर विशेष पूजन के साथ उन्होंने कहा कि अयोध्या की मर्यादा और स्वच्छता बनाए रखना ही परशुराम जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
ओम प्रकाश पांडे (अध्यक्ष, वर्तमान तीर्थ पुरोहित समाज) उन्होंने पुरोहित समाज की एकजुटता पर बल देते हुए तीर्थ यात्रियों की सेवा को सर्वोपरि बताया। एकजुट हुआ पुरोहित समाज समारोह में कलिकानंद महाराज, अजीत पुरोहित (विनय तीर्थ समाज) सहित कई गणमान्य जनों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि वर्तमान समय में नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और पूर्वजों के त्याग से अवगत कराने की आवश्यकता है। भगवान परशुराम का जीवन हमें सिखाता है कि जब-जब समाज में अधर्म बढ़ता है, तब-तब शक्ति और भक्ति का संगम ही धर्म की पुनः स्थापना करता है। तीर्थ पुरोहित समाज आयोजन की मुख्य झलकियाँ भगवान परशुराम के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन। शस्त्र पूजन और शांति पाठ। अयोध्या के विकास और तीर्थ यात्रियों की सुविधाओं पर चर्चा।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में तीर्थ पुरोहित और स्थानीय श्रद्धालु उपस्थित रहे, जिन्होंने सामूहिक रूप से समाज की खुशहाली की कामना की।