रावत मंदिर अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा का हुआ भव्य समापन
महेन्द्र कुमार उपाध्याय
अयोध्या। अयोध्या के प्रतिष्ठित रावत मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के अंतिम दिन गुरुवार को श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। कथा के समापन अवसर पर सुप्रसिद्ध भागवताचार्य एवं रामायणी रामनयन दास ने सुदामा चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता विश्व के लिए एक अनमोल उदाहरण और महान प्रेरणा है। दो लोक की संपत्ति देकर निभाया मित्रता का धर्म कथा का रसपान कराते हुए भागवताचार्य ने बताया कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता गुरु संदीपनि के आश्रम में पनपी थी। समय चक्र के कारण सुदामा जहां निर्धनता में जीवन व्यतीत कर रहे थे, वहीं श्रीकृष्ण द्वारकाधीश बन चुके थे। पत्नी सुशीला के आग्रह पर जब सुदामा द्वारका पहुंचे, तो भगवान ने नंगे पैर दौड़कर अपने मित्र का स्वागत किया। श्रीकृष्ण ने सुदामा की दीनहीन दशा देखकर स्वयं उनके चरण धोए। जब सुदामा ने संकोचवश चार मुट्ठी चावल की भेंट दी, तो भगवान ने उसे बड़े चाव से स्वीकार किया और उस तुच्छ भेंट के बदले सुदामा को दो लोकों की संपत्ति प्रदान कर दी।भक्ति और विश्वास से बदल जाता है भाग्य रामनयन दास जी ने श्रद्धालुओं को सीख दी कि सच्ची मित्रता में ऊंच-नीच का कोई स्थान नहीं होता। उन्होंने बताया कि जब सुदामा वापस अपने गांव लौटे, तो प्रभु की कृपा से उनकी झोपड़ी एक भव्य महल में तब्दील हो चुकी थी। यह कथा हमें सिखाती है कि निस्वार्थ भक्ति और अटूट विश्वास ही ईश्वर की कृपा पाने का एकमात्र मार्ग है। समारोह में गरिमामयी उपस्थिति श्रीमद्भागवत कथा के समापन अवसर पर क्षेत्र की कई गणमान्य विभूतियां उपस्थित रहीं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:
महंत बालक दास जी महाराज (रावत मंदिर) बीरेंद्र सिंह (पूर्व चेयरमैन, घुघली) संतोष जयसवाल (चेयरमैन) अनुज कुमार तिवारी,शांतनु दास,चतुर्भुजा सिंह,अनुज शुक्ला बैजनाथ यादव उर्फ बबलू यादव सेतुभान सिंह एवं अनिल कुमार रावत मंदिर अयोध्या में श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन श्रद्धालुओं को कथा सुनाते भागवताचार्य रामनयन दास रामायणी।