हर्रैया में श्रीमद्भागवत कथा का बाल लीलाओं के माध्यम से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
शक्ति शरण उपाध्याय
बस्ती। स्थानीय विकास क्षेत्र के उभाई गांव में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पंचम दिवस का आयोजन अत्यंत भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुआ। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जहां भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला।
कथा व्यास भुवनेश शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण की मनमोहक बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन करते हुए पूतना वध और मोक्ष, माखन चोरी, कालिया नाग मर्दन तथा गोवर्धन पूजा की कथा को विस्तार से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का बाल स्वरूप प्रेम, आनंद और निष्कलंक भक्ति का प्रतीक है, जो मानव जीवन को सरलता और सच्चाई की राह दिखाता है। अपने प्रवचन में उन्होंने कालिया नाग प्रसंग के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार कालिया नाग ने यमुना के जल को विषाक्त किया था, उसी प्रकार आज मानव गतिविधियों से नदियां प्रदूषित हो रही हैं। भगवान श्रीकृष्ण का यह संदेश आज भी प्रासंगिक है कि जल, वन और गोधन की रक्षा करना प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है, क्योंकि इनके बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं है। कथा के दौरान मुख्य यजमान चन्द्रशेखर उपाध्याय, शिवकुमारी एवं शांति देवी ने विधि-विधान से व्यास पीठ की आरती उतारी और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की। पूरे परिसर में भजन-कीर्तन और जयघोष से भक्तिमय वातावरण बना रहा। इस अवसर पर गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष एवं राज्यमंत्री महेश शुक्ल, पूर्व विधायक सीए चंद्र प्रकाश शुक्ला, समाजसेवी चंद्रमणि पाण्डेय ‘सुदामा’, चंद्र कमल उपाध्याय, रामपाल उपाध्याय, राजेश, महेंद्र उपाध्याय, राकेश, आयुष, शरद, दीपक, अभिषेक सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक आस्था को मजबूती दी, बल्कि समाज को पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूक करने का भी कार्य किया।