लखनऊ, उत्तर प्रदेश में विकसित हो रही ‘टेंपल इकॉनमी’ अब पर्यटन और स्थानीय रोजगार का मजबूत आधार बनती जा रही है। प्रदेश के तीर्थ स्थलों पर पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है और पर्यटन से जुड़ी सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने सोमवार को कहा कि प्रदेश अब ‘ग्रेवयार्ड इकॉनमी’ से निकलकर मंदिरों, तीर्थ स्थलों और सांस्कृतिक आयोजनों पर आधारित अर्थव्यवस्था की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आस्था, त्योहार और सांस्कृतिक परंपराएं अब पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दे रही हैं।मंत्री ने बताया कि ब्रज रंगोत्सव 2026 के दौरान होली के प्रमुख दिनों में ही ब्रज क्षेत्र में 44 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे। लठमार होली, फूलों की होली, हुरंगा और मथुरा-वृंदावन के मंदिरों में आयोजित पारंपरिक कार्यक्रमों ने देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित किया। अमेरिका, यूके, रूस और ब्राजील सहित कई देशों से लोग इन उत्सवों में शामिल होने के लिए पहुंचे।जयवीर सिंह ने बताया कि मथुरा-वृंदावन से लेकर अयोध्या और काशी तक उत्तर प्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थल अब वैश्विक पहचान बना चुके हैं। वर्ष 2025 में अकेले मथुरा में लगभग 10.24 करोड़ श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे, जो धार्मिक पर्यटन की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाता है। इसी क्रम में ब्रज क्षेत्र के समग्र विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। हाल ही में ब्रज तीर्थ विकास परिषद की बैठक में लगभग 300 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई है। इसके तहत मथुरा से वृंदावन के बीच 11.80 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग के निर्माण और आधुनिक पॉड रैपिड ट्रांजिट सिस्टम जैसे कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जा रहा है।प्रदेश सरकार ने ब्रज तीर्थ विकास परिषद की स्थापना के बाद से क्षेत्र के विकास के लिए बजट में निरंतर वृद्धि की है। वित्तीय वर्ष 2018-19 में 4387.91 लाख रुपये से शुरू हुई यह राशि 2019-20 में बढ़कर 12483.47 लाख रुपये हो गई। इसके बाद 2020-21 में 5170 लाख, 2021-22 में 5500 लाख, 2022-23 में 6000 लाख, 2023-24 में 10000 लाख और 2024-25 में 14000 लाख रुपये स्वीकृत किए गए, जो ब्रज क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।मथुरा-वृंदावन सहित ब्रज क्षेत्र के व्यापक विकास ने दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित किया है। भगवान कृष्ण की लीलाओं और राधा रानी की भक्ति से जुड़े इस क्षेत्र में बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर, प्रेम मंदिर, राधा रमण मंदिर, श्री रंगनाथ मंदिर, शाहजी मंदिर, गोविंद देव जी मंदिर, प्रियाकांत जू मंदिर और मदन मोहन मंदिर जैसे प्रमुख आस्था स्थल बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।ब्रज क्षेत्र में फरवरी-मार्च के दौरान आयोजित रंगोत्सव के समय श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है। वर्ष 2016 में जहां फरवरी-मार्च के दौरान 19.90 लाख श्रद्धालु ब्रजधाम पहुंचे थे, वहीं 2023 में यह संख्या बढ़कर 33.26 लाख हो गई। वर्ष 2024 में 44 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंचे और 2025 में यह आंकड़ा 54 लाख के पार पहुंच गया।पर्यटन विभाग द्वारा ब्रज क्षेत्र में कई विकास परियोजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है। मथुरा-वृंदावन मार्ग स्थित मयूर संरक्षण केंद्र के सौंदर्यीकरण, मथुरा परिक्रमा मार्ग के नवीनीकरण और पांच पवित्र कुंडों के जल शोधन व सौंदर्यीकरण के कार्य प्रगति पर हैं। इसके साथ ही गोवर्धन के ग्राम परासौली में सूरदास की समाधि परिसर के संरक्षण और अकबरपुर में पर्यटक सुविधा केंद्र का निर्माण भी अंतिम चरण में है। मथुरा और वृंदावन के बीच बन रहा ऑडिटोरियम व कन्वेंशन हॉल भी जल्द पूरा होने वाला है, जिससे सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा।वोकल फॉर लोकल’ अभियान के चलते स्थानीय उत्पादों की मांग भी बढ़ी है। मथुरा के जैत गांव में तुलसी माला निर्माण एक बड़ा रोजगार केंद्र बन चुका है, जहां सैकड़ों लोग इससे जुड़कर आजीविका कमा रहे हैं। वहीं परासौली के हस्तशिल्प और गोवर्धन का फूल बाजार भी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं। मंत्री के अनुसार बेहतर कनेक्टिविटी और सुविधाओं के कारण मथुरा, अयोध्या और काशी जैसे तीर्थस्थल अब आर्थिक गतिविधियों के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहे हैं।
————–