प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के जन्मउत्सव पर भव्य आयोजन

 

 

अयोध्या। जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव की परंपरा आज भी अयोध्या में श्रद्धा और आस्था के साथ जीवित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान ऋषभदेव का जन्म अयोध्या की पावन भूमि पर हुआ था, इसलिए यह स्थान जैन धर्मावलंबियों के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। दूर-दूर से श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान ऋषभदेव के चरणों में नमन करते हैं और उनकी शिक्षाओं को स्मरण करते हैं।
जैन ग्रंथों के अनुसार भगवान ऋषभदेव ने मानव समाज को सभ्य जीवन की दिशा दिखाई। उन्होंने लोगों को कृषि, लेखन, व्यापार और सामाजिक जीवन की अनेक विधाओं का ज्ञान दिया। इसी कारण उन्हें मानव सभ्यता के मार्गदर्शक के रूप में भी याद किया जाता है। उनकी शिक्षाओं का मुख्य आधार अहिंसा, संयम और त्याग रहा, जिसे आज भी जैन समाज अपने जीवन में अपनाने का प्रयास करता है।
अयोध्या स्थित जैन मंदिरों में भगवान ऋषभदेव की भव्य प्रतिमाएं स्थापित हैं, जहां प्रतिदिन पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। विशेष अवसरों पर देश के विभिन्न हिस्सों से जैन श्रद्धालु यहां आकर भगवान का अभिषेक और पूजन करते हैं। मंदिरों में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रवाह निरंतर बना रहता है।
धार्मिक आचार्यों का कहना है कि भगवान ऋषभदेव द्वारा दिया गया सत्य, अहिंसा और संयम का संदेश आज भी समाज को सही मार्ग दिखाता है। यही कारण है कि हजारों वर्ष बीत जाने के बाद भी उनकी परंपरा और शिक्षाएं लोगों के जीवन में प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।