गैस के लिए सुबह से लग रही लंबी कतारें, ग्रामीण क्षेत्रों से भी उमड़ी भीड़

गैस के लिए सुबह से लग रही लंबी कतारें, ग्रामीण क्षेत्रों से भी उमड़ी भीड़

बस्ती ( अनुराग लक्ष्य न्यूज ) प्रदेश सरकार द्वारा गैस की कालाबाजारी रोकने के सख्त निर्देशों के बावजूद बस्ती जिले में एलपीजी सिलेंडर को लेकर हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गैस वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखते हुए कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाई जाए, लेकिन बस्ती में स्थिति इन दावों के बिल्कुल उलट दिखाई दे रही है। यहां गैस सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं की लंबी कतारें इस बात की गवाही दे रही हैं कि व्यवस्था कहीं न कहीं पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है।

शहर की भारत गैस एजेंसी के बाहर इन दिनों सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। स्थिति यह है कि कई लोग 30 से 35 किलोमीटर दूर ग्रामीण इलाकों से गैस सिलेंडर लेने के लिए बस्ती पहुंच रहे हैं और घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। ग्रामीण उपभोक्ताओं का कहना है कि गांवों में स्थित एजेंसियां उन्हें यह कहकर लौटा देती हैं कि गैस की सप्लाई नहीं आई है या स्टॉक खत्म हो गया है। मजबूरन लोगों को शहर का रुख करना पड़ रहा है।

लाइन में खड़े लोगों का कहना है कि सुबह से लेकर दोपहर और कई बार शाम तक इंतजार करने के बाद भी सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं होती। कई उपभोक्ता बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने को मजबूर हैं। इससे रोज कमाने-खाने वाले लोगों के सामने गंभीर समस्या खड़ी हो गई है, क्योंकि पूरा दिन लाइन में लगने से उनका कामकाज भी प्रभावित हो रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब आम उपभोक्ताओं को गैस सिलेंडर के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है, तो शहर के होटलों, रेस्टोरेंटों और जगह-जगह लगे फास्ट फूड स्टालों पर गैस की सप्लाई आखिर कहां से हो रही है। लोगों का आरोप है कि कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई बंद होने के बाद भी इन स्थानों पर गैस आसानी से उपलब्ध है, जिससे कालाबाजारी और मिलीभगत की आशंका और गहरा रही है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि कुछ हॉकर और बिचौलिए गैस एजेंसियों से सांठगांठ कर घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी कर रहे हैं। आरोप है कि जरूरतमंद उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं मिल रहा, जबकि वही सिलेंडर बाजार में करीब 2000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। इस खेल में एजेंसी स्तर पर मिलीभगत होने की भी चर्चा आम हो गई है।

वहीं इस पूरे मामले में जब जिला पूर्ति अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि जिले में एलपीजी की कोई कमी नहीं है और सभी एजेंसियों पर पूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर तैनात कर दिए गए हैं। उनके अनुसार वितरण व्यवस्था पूरी तरह सामान्य है और कालाबाजारी की कोई शिकायत सामने नहीं आई है।

हालांकि जमीनी हालात प्रशासन के दावों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। एजेंसियों के बाहर लगी लंबी कतारें, ग्रामीण क्षेत्रों से आए परेशान उपभोक्ता और बाजार में महंगे दामों पर बिक रहे सिलेंडर इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि कहीं न कहीं व्यवस्था में गंभीर खामियां हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन वास्तव में गैस की कालाबाजारी पर लगाम लगाएगा या फिर जिला पूर्ति विभाग और गैस एजेंसियों के कथित गठजोड़ के बीच आम जनता इसी तरह लाइन में खड़ी होकर परेशान होती रहेगी। फिलहाल बस्ती में गैस को लेकर मचे हाहाकार ने सरकारी दावों की पोल खोलकर रख दी है।