यूजीसी के समर्थन में निकाली पद यात्रा, राष्ट्रपति को भेजा 6 सूत्रीय ज्ञापन
नये नियमों को लागू कराने, एस.सी., एस.टी., ओबीसी का उत्पीड़न बंद कराने की मांग
बस्ती। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर लेकर स्थगन आदेश के बावजूद समर्थन और विरोध में आन्दोलनों, धरना प्रदर्शन का सिलसिला जारी है। मंगलवार को बहुजन एकता मंच द्वारा यूजीसी के नए नियमों के समर्थन में राजकीय इण्टर कालेज से जिलाधिकारी कार्यालय तक पद यात्रा निकाली गई। पद यात्रा के दौरान लोग एस. सी., एस.टी., ओबीसी आवाज दो हम एक हैं, भेदभाव नहीं अधिकार चाहिये, परम्परा नहीं संविधान चाहिये आदि की तख्तियां लिये हुये थे। पद यात्रा जिलाधिकारी कार्यालय पर पहुंची तो सी.आर.ओ. कीर्ति प्रकाश भारती के माध्यम से राष्ट्रपति को 6 सूत्रीय ज्ञापन भेजा गया। ज्ञापन में मांग किया गया है कि यूजीसी के नये नियमों को लागू किया जाय।
राष्ट्रपति को भेजे ज्ञापन में कहा गया है कि भारत के संविधान, सामाजिक न्याय, समानता एवं मानवीय गरिमा में अटूट विश्वास रखने वाले नागरिक हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा लागू किए गए नये नियमों का हम पूर्ण समर्थन करते हैं। देश की उच्च शिक्षण संस्थाओं में पिछले कई वर्षों से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक समुदाय, महिलाएं दिव्यांग विद्यार्थी के साथ जातिगत भेदभाव मानसिक उत्पीडन शैक्षणिक बहिष्कार और सामाजिक अपमान की निरंतर घटनाएं सामने आली रही है। वर्ष 2012 में भेदभाव रोकने हेतु नियम बनाये गये किन्तु उनका प्रभावी पालन नहीं हो सका। परिणामस्वरुप 2019 से 2024 के बीच जाति-आधारित भेदभाव के मामलों में 118.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। यूजीसी की रिपोर्ट के अनुसार इस अवधि में 1,160 से अधिक औपचारिक शिकायते दर्ज हई जिनमें दलित-आदिवासी छात्रों के साथ भेदभाव सामाजिक-आर्थिक आधार पर हाशिए पर डालना और आत्मघाती प्रवृत्तियां शामिल हैं। ऐसे स्थिति में नये नियमों को बनाये रखा जाय।
ज्ञापन देने के बाद सरदार सेना के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य चौधरी बृजेश पटेल, भीम आर्मी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य कमलेश सचान, राम प्रकाश पटेल, बुद्धि प्रकाश एडवोकेट, तिलकराम गौतम ने कहा कि यूजीसी का नया नियम समता स्थापित करने की दिशा में बढ़ा हुआ कदम था, जिसके पक्ष में भाजपा सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पक्ष नहीं रखा है, जिसके कारण सुप्रीम कोर्ट के द्वारा स्टे लगा दिया गया। कहा कि ओबीसी, एससी, एसटी, महिला एवं दिव्यांग छात्रों के साथ सूक्ष्म स्तर पर जातिगत भेदभाव होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पीएचडी इंटरव्यू से लेकर विभागाध्यक्षों की नियुक्ति तक में पक्षपात की घटनाएं आम हैं। इसे रोका जाना चाहिये।
इसी कड़ी में महिपाल पटेल एडवोकेट, अजय आजाद, मयंक चौरसिया, विनय चौधरी, ई. चन्द्रशेखर वर्मा, शिवशंकर चौधरी शाका, रामलौट, चन्द्रगुप्त मौर्य, संदीप निषाद ने कहा कि जब यह ऐतिहासिक नियम प्रभावी होने वाला था, तभी सुप्रीम कोर्ट ने इस पर ‘स्टे’ लगा दिया। वक्ताओं ने इसे सामाजिक न्याय की राह में एक बड़ा अवरोध बताया। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग किया कि वह इस मामले में प्रभावी पैरवी करे और कोर्ट से स्टे हटवाकर इन नियमों को जल्द से जल्द सभी विश्वविद्यालयों में लागू करवाए।
पद यात्रा और जुलूस में महेंद्र कुमार एडवोकेट, चांदनी गौतम, मूलचंद आजाद, आकाश पटेल, अनिल चौधरी देवरिया माफी, अशोक बौद्ध, अभिषेक चौधरी, राजा भैया, राम शंकर निराला, संदीप गोयल एडवोकेट, प्रशांत भारती एडवोकेट, रामचेत, अभय पटेल, रंजीत आजाद, विजय चौधरी, अतर सिंह गौतम, अरविंद, राहुल, हरिप्रसाद, बसंत चौधरी, राजा बाबू, सोहन, दीपक कुमार, अशोक प्रभात, विवेक ओबेरॉय, अंकुर गौतम, सुरेंद्र, पीके गौतम, रामबहोर, राजन कुमार, चन्द्र प्रकाश गौतम, आरके आनंद, शिवराम कनौजिया, सिद्धनाथ प्रजापति, अभिषेक चौधरी, वीरू चौधरी, रवि चौधरी, कल्लू, सुनील पटेल, अभय, सत्येंद्र चौधरी, अजीत यादव, सर्वेश, अनिरुद्ध चौधरी ,अंकुर पटेल, संतोष कुमार, शिव प्रताप वर्मा, डीके वर्मा, गौरीशंकर कनौजिया, अंकुर, राज नारायण, सोनू, रामसेवक बौद्ध, विजय, मंगल सिंह राव, अजय कुलश्रेष्ठ, शैलेंद्र चौधरी, अरुण राज, पवन कुमार आदि शामिल रहे।