यूजीसी के नये नियमों पर रोक लगाने का सर्वोच्च न्यायालय का फैसला सराहनीय- डॉ. विवेक त्रिपाठी
बस्ती। शिक्षक डॉ. विवेक त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा जातिगत भेदभाव की परिभाषा से संबंधित विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के 2026 के समानता नियमों के संचालन पर रोक लगा देने के निर्णय का स्वागत करते हुये कहा है कि अच्छा हो कि सरकार स्वयं इसे वापस ले ले।
यूजीसी के नये नियमों का मुखर विरोध करने वाले डा. विवेक त्रिपाठी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय सराहनीय है। न्यायालय ने उचित ही कहा है कि शिक्षण संस्थानों में ‘स्वतंत्र, निष्पक्ष और समावेशी वातावरण चाहता होना चाहिये। नए नियम समाज को विभाजित कर सकते हैं। पीठ ने निर्देश दिया कि 2012 के पुराने नियम फिलहाल लागू रहेंगे।
यूजीसी ने हाल ही में उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026 जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में वंचित समूहों की शिकायतों के निवारण और सहायता के लिए एक संरचित ढांचा तैयार करना है। इस बीच, यूजीसी के नए नियमों ने छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक समूहों के बीच आक्रोश पैदा कर दिया है, क्योंकि यूजीसी के नियमों में ‘जाति-आधारित भेदभाव’ शब्द की परिभाषा को लेकर नाराजगी व्यक्त की गई है। मामले में अगली सुनवाई की तिथि 19 मार्च निश्चित की गई है